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भारत में मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन का व्यवसाय कैसे शुरू करें – How to Start Honey Production/Bee farming Business in India

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पुरातन काल से ही शहद का उत्पादन करने के लिए मधुमक्खी पालन (Beekeeping) किया जाता रहा है। Beekeeping को कृषि का ही एक अंग माना जाता है। इसके द्वारा कृषि को भी लाभ पहुँचता है और फसलों की पैदावार भी बढ़ती है।

मधुमक्खी पालन अथवा शहद उत्पादन की गिनती कम लागत पर अधिक लाभ देने वाले व्यवसायों में की जाती है। यह किसानों को खेती के साथ ही आय का एक अन्य लाभकारी स्रोत भी उपलब्ध कराता है।

शहद को प्राकृतिक मिठास का सबसे उत्तम स्रोत माना जाता है और औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इसे एक प्राकृतिक औषधि के रूप में भी उपयोग किया जाता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक अधिकांश लोग खाद्य पदार्थों में मिठास लाने के लिए चीनी की जगह शहद का ही प्रयोग करते हैं।

मधुमक्खी पालन की जानकारी /Madhumakhi palan in Hindi

बीते कुछ वर्षों में शहद की माँग में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर काफी तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है। नतीज़तन देश में शहद की खपत में निरंतर वृद्धि के साथ ही इसके निर्यात में भी महत्त्वपूर्ण बढ़त देखने को मिली है।

शहद की इस बढ़ती माँग और नई तकनीकों के आने से अब इस व्यवसाय में पहले की तुलना में मुनाफ़ा भी बढ़ा है। यही कारण है कि अब युवा व्यवसायी भी इस व्यवसाय को गम्भीरता से ले रहे हैं और इस क्षेत्र में कदम रख रहे हैं।

भारतीय बाज़ार में शहद की मज़बूत व्यावसायिक स्थिति

भारतीय बाज़ार की बात करें तो यहाँ branded और unbranded दोनों प्रकार के शहद का संयुक्त रूप से लगभग 2000 करोड़ का सालाना व्यापार है। इसमें branded शहद की हिस्सेदारी तक़रीबन 700-800 करोड़ है।

वर्तमान में branded शहद का बाज़ार तक़रीबन 10% compound annual growth rate (CAGR) से बढ़त की ओर अग्रसर है। देश में हर साल लगभग 700 करोड़ टन प्राकृतिक शहद का उत्पादन किया जाता है जिसमें से लगभग 50% शहद का सालाना निर्यात होता है।

भारतीय शहद के लिए निर्यात बाज़ार में हैं अपार संभावनायें

भारतीय शहद को इसकी गुणवत्ता के लिए विश्व भर में जाना जाता है। 2010-2016 के दौरान भारतीय शहद की वैश्विक मांग (global demand) में तकरीबन 240% की वृद्धि दर्ज़ की गई। इस अवधि में भारतीय शहद का सबसे ज़्यादा निर्यात अमेरिका में हुआ और हाल के कुछ वर्षों में इसमें लगभग 356% तक की वृद्धि हुई है।

अमेरिका के अलावा भारतीय शहद के अन्य बड़े आयातकों में यूनाइटेड अरब एमिरेट्स(UAE), सऊदी अरब, बंगलादेश और मोरक्को शामिल हैं। भारतीय शहद की वैश्विक स्तर पर बढ़ती हुई मांग को देखते हुए निर्यात बाज़ार में इस व्यवसाय के लिए अपार संभावनायें हैं।

भारत में बड़े पैमाने पर हो रहा है मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन

भारत में मधुमक्खी पालन प्रायः पहाड़ी क्षेत्रों में किया जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस व्यवसाय में बढ़ते लाभ की वजह से देश के मैदानी क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर मधुमक्खी पालन किया जाने लगा है।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश, दक्षिणी राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तरांचल, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु आदि विभिन्न राज्यों में बड़े स्तर पर लोग मधुमक्खी पालन में संलग्न हैं और बड़ी तादाद में शहद का उत्पादन कर रहे हैं।

मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन में आने वाली लागत की तुलना में लाभ का अनुपात(ratio) कहीं ज़्यादा है। इस उद्योग के विस्तार में तेज़ी का एक कारण इसमें man power की सीमित आवश्यकता होना भी है क्योंकि शहद उत्पादन का मुख्य कार्य पूर्ण रूप से मधुमक्खियों द्वारा किया जाता है। उसके बाद होने वाले अन्य कार्यों एवं देखरेख के लिए ही केवल man power की ज़रुरत होती है।

मधुमक्खी पालन (Beekeeping / apiculture )और शहद उत्पादन का व्यवसाय कैसे शुरू करें

किसी भी उद्योग की स्थापना करने और उसे सफ़ल बनाने के लिए उसके विषय में सटीक जानकारी का होना अत्यंत आवश्यक है। यदि आप मधुमक्खी पालन या शहद उत्पादन का व्यापार करना चाहते हैं तो सबसे पहले किसी नज़दीकी मधुमक्खी फ़ार्म का दौरा करें और वहाँ की कार्यप्रणाली को ग़ौर से देखें-समझें। इसके अलावा आप इस व्यापार से संबंधित व्यावसायिक प्रशिक्षण भी ले सकते हैं।

मधुमक्खी पालन की बुनियादी जानकारी (Honey Bee Farming Information)
  • मधुमक्खी फ़ार्म में मधुमक्खियों को विशेष रूप से निर्मित लकड़ी के डिब्बों में पाला जाता है। प्रत्येक डिब्बे में तीन तरह की मधुमक्खियाँ होती हैं – रानी मधुमक्खी, नर मधुमक्खी और श्रमिक मधुमक्खी। इनमें रानी की औसत आयु (average age) एक साल, नर की औसत आयु 6 महीने, और श्रमिक की औसत आयु 40-45 दिन होती है।

 

  • एक डिब्बे में अधिकतम 10 फ्रेम मधुमक्खी रख सकते हैं। लेकिन बेहतर होगा कि आप उतने ही फ्रेम मधुमक्खी रखें, जिनकी आप ठीक से देखभाल कर सकें। हालांकि अगर आपके बजट में हो तो आप मधुमक्खियों की देखभाल करने के लिए अपने फ़ार्म में प्रशिक्षित बीकीपर्स (trained beekeepers) को भी नियुक्त कर सकते हैं।

 

  • एक डिब्बे से एक साल में लगभग 50 kg शहद का उत्पादन होता है और साथ ही 2-3 डिब्बों के लायक नई मधुमक्खियाँ भी प्राप्त हो जाती हैं। इस तरह मधुमक्खियों की संख्या के साथ ही शहद की मात्रा में भी नरंतर वृद्धि होती रहती है।

 

  • मधुमक्खियों के रहने के लिए नमी रहित (moistureless) , साफ़-सुथरे और खुले स्थान का चुनाव करें। ध्यान रखें कि आपके द्वारा चुने हुए स्थान में पर्याप्त छाया के लिए बड़े छायादार वृक्षों, आवश्यक धूप और स्वच्छ पानी का समुचित प्रबंध हो। इसके साथ ही ज़रूरी है कि आप अपने फ़ार्म के लिए अच्छी प्रजाति (species) की मधुमक्खियों का ही चुनाव करें।

 

  • मधुमक्खी पालन का उपयुक्त समय नवम्बर से शुरू होता है। इसलिए जहाँ तक संभव हो इससे पहले ही सभी संसाधन जुटा लें और अन्य सभी आवश्यक तैयारियाँ भी कर लें।
शहद प्रसंस्करण संबंधी जानकारी (Honey Processing Related Information)
  • छत्तों में शहद एकत्रित होने के बाद उसका प्रसंस्करण (process) करने के लिए एक शहद प्रसंस्करण संयंत्र (honey processing plant ) की आवश्यकता होती है। इसके द्वारा छत्तों से शहद निकालने और उसे साफ़ करने के साथ ही पैकिंग का काम भी किया जाता है। इस संयंत्र को लगाने में लगभग 20 लाख की लागत आती है।

 

  • शहद बनाने के लिए सबसे पहले मधुकोष (honeycomb) से मधुमक्खी के छत्ते (beehive) को अलग किया जाता है और उसे पूरी सुरक्षा के साथ शहद प्रसंस्करण (honey processing) के लिए ले जाया जाता है।

 

  • मधुकोष को मशीन के निष्कर्षक (extractor) में डालकर उसमें से शहद निकाला जाता है। उसके बाद शहद को 49 डिग्री सेंटीग्रेड तक ग़र्म किया जाता है (ताकि उसमें उपस्थित सभी क्रिस्टल अच्छी तरह से पिघल जाएं) और अगले 24 घंटे तक इसी तापमान पर रखा जाता है। उसके बाद शहद की पैकिंग और लेबलिंग की जाती है।

 

  • अगर आपका बजट कम हो और अपना ख़ुद का शहद प्रसंस्करण संयंत्र (honey processing plant) लगाने की क्षमता न हो तो आप कहीं और से शहद का निष्कर्षण (extraction) करा सकते हैं।

 

बिज़नेस प्लान एवं पूँजी का प्रबंध (Business Plan & Funding Arrangements)

मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन के लिए आवश्यक सभी संसाधनों और उनकी लागत का पता करें। अपना बिज़नेस प्लान बनाएं और उसके अनुसार आवश्यक पूँजी का प्रबंध करें।

अगर आप छोटे स्तर पर मधुमक्खी पालन की शुरुआत करते हैं तो 2.5 से 3 लाख रूपये में सरलता से यह उद्योग स्थापित कर सकते हैं। हालांकि शहद निकालने का प्लांट स्थापित करने के लिए आपको अधिक पूँजी की आवश्यकता होगी। उसके लिए आप सरकारी योजना के अंतर्गत loan ले सकते हैं।

पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग (Registration & Licensing)

मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन संबंधी व्यापार के लिए आवश्यक पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया का पता करें। उसके अनुसार अपने उद्योग को पंजीकृत करायें और सभी तरह के ज़रूरी लाइसेंस भी प्राप्त करें। खाद्य पदार्थ संबंधी व्यापार होने के कारण भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (fssai – https://foodlicensing.fssai.gov.in/index.aspx) से अपने उत्पाद की जांच कराकर लाइसेंस लेना आपके लिए विशेष रूप से अनिवार्य है।

बिक्री के साथ ही प्रचार पर भी दें ध्यान

शहद उत्पादन और पैकजिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिक्री की तैयारी करें। अपने उद्योग और उत्पाद का प्रचार करें ताकि लोगों को आपके उत्पाद के बारे में पता चल सके। इसके लिए आप स्थानीय सेवाओं की मदद लेने के साथ ही सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस व्यवसाय में सफ़ल होने के लिए अपने उत्पाद की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। आजकल लोग फ़ार्म पर तैयार किये गए शहद को खरीदने में ज़्यादा रुचि दिखाते हैं। इसलिए आप बाज़ार में विक्रय करने के साथ ही स्थानीय रूप से खुद भी अपने शहद की बिक्री कर सकते हैं। साथ ही आप अपने शहद को ऑनलाइन भी बेच सकते हैं।

अपने बजट और उत्पादन के अनुसार क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री की शुरुआत करके पहले अपने व्यवसाय को जमाएं। उसके बाद अपनी उत्पादन क्षमता को देखते हुए आप निर्यात के क्षेत्र में भी क़दम रख सकते हैं।

मधुमक्खी पालन शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप इस उद्योग को स्थापित करने और आगे बढ़ाने के लिए पूरी लगन के साथ समर्पित हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि इस व्यवसाय में आपको परिणाम मिलने और लाभ होने में लगभग एक साल लगता है। इसलिए आपको इतने समय तक प्रतीक्षा करने के लिए धैर्य रखना होगा।
  • मधुमक्खियों से सही तरीके से काम कराने के लिए आपको उनके स्वभाव और कार्यशैली के बारे में समझ होना बेहद ज़रूरी है। इसलिए मधुमक्खियों और मनुष्यों के बीच तालमेल को समझें।
  • शहद का उत्पादन मुख्य रूप से मधुमक्खियों पर ही निर्भर होता है। इसलिए उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

सरकार द्वारा भी मिल रहा है प्रोत्साहन

शहद की तेज़ी से बढ़ती माँग और मधुमक्खी पालन से किसानों को मिलने वाले लाभ को देखते हुए देश में शहद उत्पादन को कई गुना बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा भी लगातार प्रयास जारी हैं। इसके लिए विभिन्न राज्यों में बड़े स्तर पर योजनायें संचालित की जा रही हैं, जिनमें इस क्षेत्र से सम्बद्ध किसानों और उद्यमियों के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण, उद्योग संबंधी जानकारी, और आर्थिक सहायता भी शामिल हैं।

भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु, एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of Micro, Small, & medium Enterprises) के खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC – Khadi and Village Industries Commission) द्वारा मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएँ संचालित की जाती हैं।

इन योजनाओं के अंतर्गत शहद प्रसंस्करण संयंत्र लगाने के लिए उद्यमी को शुरुआत में 65% तक का ऋण (loan) उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही 25% सब्सिडी के रूप में अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी मिलती है। KVIC की वेबसाइट पर आप हनी मिशन http://www.kvic.org.in/kvicres/honeymission.htm के अंतर्गत मधुमक्खी पालन व्यवसाय एवं सरकारी योजनाओं संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

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