प्रेरणादायक कहानियाँ

दही बेचकर ५ साल के अन्दर बना अरबपति – अमेरिका में यूनानी दही का तुर्की बादशाह, हम्दी उलुकाया

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प्राचीन काल से ही दूध-दही हमारे आहार का एक अहम् हिस्सा रहा है और इसका व्यापार भी बहुत पुराना है. आज के समय में इस बात को सोचना शायद इतना आसान नहीं है कि आप सिर्फ दही बेचकर अरबों रुपए कमा सकते हैं परन्तु अमेरिका की चोबानी नामक यूनानी दही बनाने वाली कंपनी ने ऐसा कर दिखाया है. इस कंपनी ने अपना पहला दही का पैकेट २००७ में बनाया और २०१२ तक इस कंपनी का सालाना कारोबार ६६ अरब रुपए से ज्यादा पहुँच गया और वो भी उस समय जब अमेरिका में सदी का सबसे बड़ा आर्थिक संकट चल रहा था और दूसरे हजारों – लाखों बिज़नेस बंद हो रहे थे. इस दही ने अपने मालिक, हम्दी उलुकाया, को भी दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल करा दिया.

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क्या होता है यूनानी दही (Greek Yogurt)?

यूनानी दही को ग्रीक योगर्ट के नाम से जाना जाता है. इसको रोज मर्रा के दही की तरह दूध में जामन डाल कर बनाया जाता है परन्तु यूनानी दही बहुत ही ज्यादा गाढ़ा होता है और इसके अन्दर पानी बिल्कुल नहीं होता. यूनानी दही बनाने के लिए ३-४ कप दूध का उपयोग १ कप दही के लिए होता है और दही बनाने के बाद सारा पानी दही से छान कर अलग कर दिया जाता है जिससे दही बहुत ही गाढ़ा और मीठा होता है. यूनानी दही में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है क्योंकि इसमें दूध का अनुपात ज्यादा होता है.

अरबों रुपए की चोबानी दही का स्वादिष्ट सफ़र 

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हम्दी की सफलता की जड़ें उसके तुर्की के साधारण गड़ेरिये परिवार के डेयरी बिज़नेस से जुड़ी हुई हैं. १९९४ में, वह परिवार का डेयरी बिज़नेस छोड़ना चाहता था और एक नए रास्ते की तलाश में पढ़ाई के लिए अमेरिका गया. अमेरिका पहुँचने पर उसको ना चाहते हुए भी डेयरी के बिज़नेस में बहुत सारे मौके दिखने लगे और उसको लगा कि यहाँ पर तुर्की जैसी दूध से बनी हुई स्वादिष्ट वस्तुयों की बहुत कमी है. हम्दी ने दृढ़ संकल्प कर लिया कि वह अव्वल दर्जे का दूध-दही का सामान अमेरिकी बाज़ार में लायेगा और उसने २००२ में फेटा पनीर का होलसेल का बिज़नेस करने वाली कंपनी, यूफ्रेट्स, शुरू किया जो कि बहुत जल्दी ही एक सफल कंपनी बन गयी.

३ साल बाद २००५ में, उसने एक विज्ञापन देखा कि एक बड़ी कंपनी अपना दही बनाने का प्लांट बंद कर रही है और उसको बेचना चाहती है. उसने उस विज्ञापन के पर्चे को कूड़ेदान में फेंक दिया लेकिन बाद में उसके दिमाग में आया कि चल कर देखते हैं. उसने पर्चे को कचरे के डब्बे से निकाला और प्लांट देखने चला गया. प्लांट देखकर उसे अपना स्वादिष्ट दही बनाने का विचार आया और उसने अपने ऊपर भरोसा करते हुए प्लांट खरीदने के लिए हाँ कर दी. उसने उसी प्लांट के ४ कर्मचारियों को नौकरी दी और शुरू कर दिया चोबानी का सफ़र. हम्दी को अपना मनचाहा स्वाद पाने में १८ महीने लग गए और २००७ में जा कर पहला चोबानी बाज़ार में आया.

शुरू के दिनों में चोबानी दही का डिमांड सिर्फ उच्च – दर्जे के स्पेशिअलिटी (Speciality) स्टोर्स से ही आया परन्तु हम्दी को भरोसा था कि जल्दी ही दूसरे बड़े स्टोर्स से आर्डर मिलेगा क्योंकि सबको एक बढ़िया स्वाद वाला दही चाहिए और साल २००९ में हम्दी का भरोसा सही हुआ जब स्टॉप & शॉप नाम के एक बड़े स्टोर ने चोबानी को सप्लायर बनाया और उसके बाद चोबानी ने फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा. चोबानी का नाम अमेरिका की तेजी से बढती हुई कंपनियों में शामिल हो गया जिसमें फेसबुक और गूगल जैसे बड़े नाम शामिल थे. यह एक बहुत ही गर्व और प्रेरणा की बात है कि एक दही बेचने वाली कंपनी इस लिस्ट में शामिल थी. आज चोबानी अमेरिका के अलावा दुनिया के बहुत से देशों में मौजूद है.

एक दानी पुरुष

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हम्दी का दान-पुण्य में बहुत भरोसा है. हम्दी ने २००७ में चोबानी का १०% प्रोग्राम शुरू किया जिसके तहत चोबानी का १०% प्रॉफिट दान में दे दिया जाता है. २०१० में, गड़ेरिया प्रदान फाउंडेशन, की स्थापना हुई जो हम्दी की माँ के सम्मान में किया गया और चोबानी का १०% प्रॉफिट इस फाउंडेशन के जरिये सामाजिक उत्थान के कार्यों में दिया जाता है.

२०१६ में, हम्दी ने अपनी कंपनी का १०% शेयर अपने कर्मचारियों में बाँट के सभी को कंपनी में हिस्सेदार बना दिया. सभी कर्मचारियों को उनके वर्षों की सर्विस के अनुसार शेयर दिए गए.

इतना दान-पुण्य करने के बाद भी हम्दी के पास १५० अरब रुपए से भी ज्यादा की धन – सम्पदा है और वह दुनिया के सफल अरबपतियों में गिना जाता है.

हम्दी को उसकी लीडरशिप के लिए बहुत सारे अवार्ड और सम्मान मिले हैं जिसमे २०१३ का, अर्न्स्ट & यंग वर्ल्ड अन्त्रेप्रेन्योर ऑफ़ द ईयर (Ernst & Young World Entrepreneur of the Year 2013) और २०१२ का, स्माल बिज़नेस एसोसिएशन का अन्त्रेप्रेन्योरियल सक्सेस ऑफ़ द ईयर अवार्ड (Small Business Administration’s Entrepreneurial Success of the Year Award) शामिल है.

बिज़नेस कहानी की राय

यह बहुत ही दुर्लभ बात है कि एक छोटे स्तर पर शुरू होने वाली कंपनी आज के बाज़ार में अपना प्रीमियम स्थान बना सके क्योंकि बड़े ब्रांड्स का आक्रमण झेलना आसान नहीं है. बड़ी कंपनियां डिस्काउंट ऑफर और मार्केटिंग पर पैसे खर्च करके ग्राहकों को लुभाना शुरू कर देती हैं लेकिन अगर आप ने प्रोडक्ट के जरिये ग्राहकों के दिल में जगह बना ली तो आपको कोई नहीं हरा सकता है. चोबानी की सफलता के पीछे भी इसके ग्राहकों का प्यार और कर्मचारियों की लगन है.

हम अपने प्रिय हिंदी पाठकों को ध्यान दिलाना चाहेंगे कि बिज़नेस आइडिया या प्रोडक्ट का उतना महत्व नहीं है जितना कि आपके फौलादी इरादे और आसमान से भी ऊँचे सपनों का. आज कल की चका-चौंध में ज्यादातर लोग मोबाइल और इन्टरनेट से जुड़े हुए बिज़नेस करने की तरफ आकर्षित रहते हैं परन्तु चोबानी ने साबित कर दिया कि रोटी, कपड़ा और मकान जैसे बुनियादी जरूरतों का बिज़नेस हमेशा ही डिमांड में रहता है.

कृपया कमेंट करके बताइये कि क्या हिंदी भाषी क्षेत्र से कोई बड़ी कंपनी बाज़ार में उम्दा खान-पान का सामान लेकर आ सकती है? आइये चर्चा शुरू करें और खोजें कि कौन सा प्रोडक्ट बना सकते हैं या जो है उसको और बेहतर कैसे बना सकते हैं?

हमारी शुभ कामनाएं आपके साथ हैं.

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