प्रेरणादायक कहानियाँ

असफलताओं की खुशी मनाकर बनी दुनिया की एक बड़ी मोबाइल गेम्स कंपनी-फिनलैंड की सुपरसेल

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यह कहानी पढ़कर आप कहेंगे कि हमें कभी भी असफलता से निराश नहीं होना चाहिए बल्कि उस अनुभव से सीख मिलने की खुशी मनानी चाहिए. बिजली के बल्ब के मशहूर आविष्कारक थॉमस एल्वा एडिसन ने अपने सफल आविष्कार से पहले की असफलताओं के बारे में बहुत अच्छी बात कही है- ”मैं इतनी बार असफल नहीं हुआ बल्कि मैंने 1०,००० ऐसे तरीके सीखे जो काम नहीं करते.” क्लैश ऑफ़ क्लांस (Clash of Clans) और हे डे (Hay Day) जैसे सुपरहिट गेम्स बनाने वाली फिनलैंड की कंपनी सुपरसेल इसी सोच के साथ दुनिया की सबसे सफल कंपनियों में शामिल हो गयी. सुपरसेल की टीम हर वक़्त नए गेम्स बनाने पर काम करती है परन्तु पिछले 7 वर्षों में उन्होंने सिर्फ 4 गेम्स ही लांच किये हैं क्योंकि उनको यदि किसी भी चरण पर ऐसा लगता है कि गेम सही तरीके से नहीं बन रहा या लोगों को पसंद नहीं आयेगा तो वो बेझिझक अपने काम को नष्ट कर देते हैं और ऑफिस में शैम्पेन की बोतल खोल कर जश्न मनाते हैं. अपने किये हुए काम पर पानी फेरने से उनको निराशा नहीं होती बल्कि वो इस असफलता से मिली हुई सीख का जश्न मनाकर और भी बेहतर गेम बनाने की प्रतिज्ञा लेते हैं. अपने अनुशासन, कड़े फैसलों और ग्राहकों को सर्वोत्तम गेम का अनुभव देने के मुख्य उद्देश्य पर केन्द्रित रहते हुए सुपरसेल ने अपनी प्रतिदिन की आय सिर्फ 4 गेम्स से ही करोड़ों रुपये में पंहुचा लिया है.

सुपरसेल की स्थापना

सुपरसेल की स्थापना करने से पहले इसके दो संस्थापकों (मिको कोडिसोजा – Mikko Kodisoja और इल्का पानानेन – Ilkka Paananen) ने मोबाइल गेम कंपनी सुमीया में एक साथ काम किया था. कोडिसोजा साल 1999 में सुमीया के संस्थापकों में से एक थे और पानानेन ने वर्ष 2000 में सीईओ के रूप में सुमीया ज्वाइन किया. साल 2003 में सुमीया ने 12 लाख यूरो का लाभ कमाया और अगले वर्ष 2004 में अमेरिकी कंपनी डिजिटल चॉकलेट ने सुमीया को खरीदकर अपना फिनलैंड का मुख्यालय बना दिया और पानानेन को यूरोप का मैनेजर बना दिया. नए मालिक के साथ व्यापारिक गतिविधियों में वृध्दि तो हुई लेकिन कंपनी की संस्कृति में बदलाव आया जो कोडिसोजा को समस्यात्मक दिशा में जाता हुआ नजर आया और उन्होंने वर्ष 2010 में कंपनी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया और जल्द ही पानानेन ने भी ऐसा किया.
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सुमीया छोड़ने के बाद पानानेन ने फाइनेंस की कंपनी लाइफलाइन वेंचर्स में काम किया, लेकिन वह एक उद्यमी बनना चाहते थे और उन्होंने एक गेम कंपनी शुरू करने की योजना बनाई. एक ऐसी कंपनी जहाँ गेम बनाने वालों के काम में कोई रोड़ा न डाले और उनको अपनी आइडिया को कार्यान्वित करने की पूरी स्वतंत्रता हो. पानानेन ने कोडिसोजा, पेट्री स्टायरमैन (Petri Styrman), लस्सी लेपिनेन (Lassi Leppinen), वीसा फोर्स्टन (Visa Forsten) और निको डेरम (Niko Derome) के साथ मिलकर साल 2010 में सुपरसेल की स्थापना की और कंपनी ने फिनलैंड के एस्पू नामक शहर में एक छोटे से ऑफिस से अपना कारोबार शुरू किया. पानानेन और कोडिसोजा ने अपनी बचत से 250,000 यूरो की पूंजी लगायी और बाद में वेन्चर कैपिटल का इन्वेस्टमेंट कंपनी में आया.

सुपरसेल के गेम्स 

सुपरसेल का पहला गेम गनशाइन.नेट (gunshine.net) था जिसको वास्तविक समय में एक साथ कई खिलाड़ी खेल सकते थे क्योंकि सुपरसेल का मूल दृष्टिकोण क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म गेमिंग सेवाओं को बनाना था, इसलिए यह विचार था कि एक दिन ये खिलाड़ी डेस्कटॉप, फेसबुक, टैबलेट और मोबाइल के जरिए गनशाइन की दुनिया में प्रवेश कर पाएंगे. फरवरी २०११ में गनशाइन का निजी बीटा संस्करण लॉन्च हुआ और बीटा ने कुछ महीने बाद काम शुरू किया. 2011 की गर्मियों में अपने चरम पर, गनशाइन में करीब पांच लाख मासिक खिलाड़ी थे परंतु कम्पनी को बहुत जल्दी ही एहसास हो गया कि इस गेम को कम अनुभव के खिलाड़ियों के लिए खेलना मुश्किल है और इसको मोबाइल पर बनाना भी मुश्किल था क्योंकि इसको खेलने के लिए कंप्यूटर के कीबोर्ड और माउस की बड़ी भूमिका थी.

गनशाइन को बनाने में लगी मेहनत, समय और पैसों को नजर अंदाज करते हुए कंपनी ने इस गेम को बंद करने का कड़ा फैसला लिया और साथ ही जितने भी गेम बन रहे थे उनको भी बंद कर दिया क्योंकि कंपनी को यह सीख मिल चुकी थी कि क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म गेमिंग का आइडिया शायद सही नहीं है और सिर्फ मोबाइल और टैबलेट पर खेले जाने वाले गेम बनाने पर अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए.

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मोबाइल गेम्स पर पूरी तरह अपना ध्यान लगाने के बाद जून 2012 में हे डे (Hay Day) और अगस्त 2012 में क्लैश ऑफ़ क्लांस (Clash of Clans) लांच हुए जो बहुत जल्द ही हिट हो गए और पूरी दुनिया में लोग दीवानों की तरह दोनों गेम्स को खेलने लगे. अपनी शुरुआत से आज तक सुपरसेल ने अनगिनत गेम्स बनाकर नष्ट किया और सिर्फ 4 गेम्स ही लांच होकर ग्राहकों तक पहुंचे जो कि बहुत हिट हैं और उनका नाम आप सभी ने जरूर सुना होगा : हे डे (Hay Day), क्लैश ऑफ़ क्लांस (Clash ऑफ़ Clans), बूम बीच (Boom Beach) और क्लैश रोयाल (Clash Royale).

मूल आस्था और कार्यनीति

सुपरसेल में शुरू के दिनों से लेकर आज तक बहुत कुछ बदला परन्तु पानानेन की मूल सोच नहीं बदली. कंपनी की नींव इस सोच पर पड़ी है कि अच्छे लोगों को काम करने की पूरी स्वतंत्रता देने पर अपने आप ही अच्छे गेम बनकर बाहर आएंगे. सुपरसेल में आज भी छोटी – छोटी टीमें हैं जिनको स्वतंत्र ‘सेल’ की तरह स्थापित किया गया है और ये सेल अपना गेम का आइडिया खुद सोचती हैं, बनाती हैं, टेस्टिंग के लिए भेजती हैं और फैसला भी लेती हैं कि लांच करना है या रद्द करना है. सभी को पता है कि उनको ऐसा गेम बनाना है जो पूरी दुनिया में लोग खेल सकें, पसंद करें और वर्षों तक खेलकर भी ना ऊबें. इन सभी सेलों का एकत्रण होकर सुपरसेल बना है और इस तरह की संरचना से कंपनी के काम में गति और उत्साह बना रहता है.

बिज़नेस कहानी की राय

इस बिज़नेस की कहानी से एक बात सही साबित होती है कि हर छोट-बड़ी असफलता हमारे जीवन या बिज़नेस में कुछ नया सीखने का मौका देती है और हमको बेहतर काम करने में मदद करती है. इसलिए हम सभी को असफलता का जश्न मनाना चाहिए. कोई भी रचनात्मक काम करने में विफलता की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि आप कुछ नयी रचना करने जा रहे हैं. अगर आप शुरूआती विफलताओं के सामने घुटने टेक देंगे तो आप हमेशा के लिए असफल कहे जायेंगे परन्तु इनसे सीख लेकर आगे बढ़ेंगे तो नयी ऊंचाइयों को छू सकेंगे.

हमें कमेंट करके बताईये कि क्या आपने कभी सुपरसेल के गेम्स खेलें हैं? इनके अलावा आपको कौन से मोबाइल गेम्स पसंद हैं और क्यों ? क्या आपके पास भी कोई मोबाइल गेम बनाने का आइडिया है और आपको उसकी पुष्टि करने में सलाह चाहिए तो हम आपकी मदद करने की कोशिश करेंगे?

हम आशा करते हैं कि आपको यह कहानी पसंद आयी होगी और आप इसको अपने रिश्तेदारों और मित्रों से जरूर शेयर करेंगे.

 

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