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क्राउडफंडिंग -बिज़नेस के लिए पूँजी जुटाने का एक स्रोत, Crowdfunding – A source of business financing

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एक स्टार्ट-अप या छोटे व्यवसाय को पूँजी इकठ्ठा (Fundraising) करने में अनगिनत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. नए व्यापार को सफल बनाने के लिए अनेक चुनौतियों से लड़ना पड़ता है जिससे उनकी सफलता की संभावना पर हमेशा एक प्रश्न चिन्ह लगा होता है. बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान नये व्यापारों को आर्थिक सहायता देने में हिचकिचाते हैं, ऐसे में अपने स्टार्ट-अप को एक अच्छी शुरुआत देने के लिए फंडिंग के वैकल्पिक स्रोत ढूँढने की आवश्यकता होती है. आपके पास विकल्प के रूप में सुरक्षित या असुरक्षित ऋण (Secured or Unsecured debt), प्राइवेट इक्विटी, वेन्चर कैपिटल इन्वेस्टमेंट, एंजेल इंवेस्टर या क्राउडफंडिंग हो सकते हैं.इनमें से कौन सा विकल्प आपके व्यवसाय के लिए दूसरों की तुलना में अधिक उपयुक्त है यह आपके रिस्क लेने की क्षमता, बिज़नेस का आकार और आवश्यक पूँजी के साइज़ पर निर्भर करता है .आज हम आपको फंडिंग के एक रोचक कॉन्सेप्ट ‘क्राउडफंडिंग’ के बारे में बताना चाहेंगे.

क्राउडफंडिंग क्या है – What is Crowdfunding? 

‘क्राउड’ यानि भीड़ या जनसमूह द्वारा फंडिंग, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक या दो गिने चुने लोग नहीं बल्कि अनेक लोग छोटे-छोटे पैसे इन्वेस्ट करके आपके फंड रेज़िंग के लक्ष्य को प्राप्त करने में आपकी मदद करते हैं. लोग अपनी क्षमता अनुसार कम से कम निर्धारित रकम से लेकर बड़ी रकम तक निवेश कर सकते हैं जिसके बदले में उन्हें निवेश किए धनराशि के अनुसार पुरस्कार दिया जाता है जैसे कि प्रोडक्ट पर एक्सक्लूसिव पहुंच या सेवाओं पर कुछ साल का डिस्काउंट और कभी-कभी बिज़नेस में इक्विटी का एक छोटा सा हिस्सा. क्राउडफंडिंग 3 पक्षों की भागीदारी पर निर्भर है – प्रोजेक्ट प्रारंभ करने वाला पक्ष जो आइडिया का प्रस्ताव रखता है, लोग या जनसमूह जो आइडिया का समर्थन करते हैं और अंततः एक ‘प्लैटफार्म’ जो सभी पक्षों को साथ लाता है. किकस्टार्टर(Kickstarter), क्राउडक्यूब (Crowdcube), क्राउडफंडर(Crowdfunder) इत्यादि कुछ विश्वस्तरीय क्राउडफंडिंग प्लैटफार्म हैं. ड्रीमवालेट्स(Dreamwallets), विशबेरी(Wishberry), मिलाप(Milaap), इम्पैक्टगुरु (Impactguru) इत्यादि कुछ भारत के क्राउडफंडिंग प्लेटफार्म हैं.

जहाँ एंजेल इन्वेस्टमेंट में एक-दो व्यक्ति आमतौर पर बिज़नेस में बड़ा स्टेक लेते हैं वहीं ‘क्राउडफंडिंग’ के द्वारा एक उद्यमी अनेक लोगों को इनवेस्टमेंट के लिएआकर्षित कर सकता है. कई मामलों में यह मॉडल एक व्यक्ति या संगठन के मुकाबले निवेश स्रोत के रूप में अधिक सफल होता है. जब बड़े निवेशक किसी असत्यापित (Unproven) आइडिया में निवेश करने में संकोच करते हैं तब ‘क्राउडफंडिंग’ सीड कैपिटल इकठ्ठा करने का एक वैकल्पिक तरीका प्रदान करता है.

वैसे देखा जाए तो इस तरह की व्यवस्था बहुत पुरानी है जिसमें अनेक लोग मिलकर एक उद्यमी को बिज़नेस शुरू करने के लिए पैसे देते हैं. मित्रों या रिश्तेदारों से योगदान , को-ऑपरेटिव सोसाइटी (Co – operative Society) और चिट फंड्स (Chit Funds) जैसे पुराने प्रचलन को भी क्राउडफंडिंग के रूप में देखा जा सकता है परन्तु इन्टरनेट की पहुँच से आधुनिक समय में क्राउडफंडिंग के नये-नये तरीके इज़ाद हो गए हैं जो काफ़ी पसंद भी किये जाने लगे हैं. ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि 2015 में लगभग $34 बिलियन (2 लाख 20 हजार करोड़ रुपये) से भी ज्यादा क्राउडफंडिंग के द्वारा पूरे विश्व में फंड इकठ्ठा किया गया.

क्राउडफंडिंग के फायदे – Advantages of crowdfunding

क्राउडफंडिंग मौद्रिक लाभ के अलावा स्टार्ट-अप बिज़नेस को अन्य कई लाभ भी प्रदान कर सकता है.

पहुँच एवं जागरूकता – ‘क्राउडफंडिंग प्लैटफार्म’ प्रोडक्ट की जानकारी फैलाने तथा आपके बिज़नेस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक शक्तिशाली मंच प्रदान कर सकता है. इस कैंपेन में शुरूआत से लेकर अंत तक सोशल मीडिया, इमेल तथा अन्य दूसरे ऑनलाइन मार्केटिंग के तरीकों से कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँच बनाई जा सकती है.

प्रोडक्ट की मान्यता – आपके प्रोडक्ट या सर्विसेज की डिमांड मार्केट में आने से पहले ही आँका जा सकता है. अगर आप अपने ‘क्राउडफंडिंग लक्ष्य’ को हासिल कर लेते हैं तो यह संभावित ग्राहकों, सप्लायर या भविष्य के निवेशकों को स्पष्ट संदेश देता है कि आपके पास जनता का समर्थन है जो आपके बिज़नेस की नींव को मजबूत करने तथा उसे काफी तेज़ी से फैलाने में मदद करता है.

सुधार का मौका – क्राउडफंडिंग कैंपेन के दौरान लोगों को प्रोडक्ट जानने का मौका मिलता है और अगर उनके मन में कोई प्रश्न या आशंका है तो वे आपको प्लैटफार्म के जरिये संपर्क कर सकते हैं. इस प्रक्रिया में लोगों का नजरिया जानने को मिलता है और इस दौरान अगर आपको सुधार या बदलाव की कोई गुंजाइश दिखाई दे तो उसे भी किया जा सकता है.    

गति एवं सरलता – क्राउडफंडिंग काफी तीव्र गति से फंड रेज़ करने वाला माध्यम साबित हो सकता है. ऐसे बहुत सारे स्टार्ट-अप बिज़नेस हैं जो इस माध्यम से एक बड़ी धन राशि सिर्फ कुछ ही दिनों में इकट्ठा कर चुके हैं. आम तौर पर इसमें आपको कोई अपफ्रंट फीस नहीं देनी पड़ती और बहुत से ‘क्राउडफंडिंग प्लैटफॉर्म्स’ इस प्रक्रिया के कानूनी प्रबंधों की भी देख रेख कर लेते हैं जिससे आपके लिए प्रक्रिया बहुत सरल हो जाती है.

क्राउडफंडिंग के कुछ प्रकार – Types of Crowfunding

1. दान-आधारित क्राउडफंडिंग – Donation based

किसी चैरिटी, आपदा राहत, नॉन प्रॉफिट संस्थानों या फिर किसी मेडिकल बिल के लिए किया हुआ फंडरेजिंग जिसमें इन्वेस्टर को कोई आर्थिक लाभ ना हो उसे दान पर आधारित क्राउडफंडिंग कहते हैं.

2. इनाम-आधारित क्राउडफंडिंग – Reward based

इनाम-आधारित क्राउडफंडिंग अक्सर उत्पादों, सेवाओं, परियोजनाओं या केवल एक बिज़नेस आइडिया को सूचीबद्ध करता है और लोगों को इनाम के लिए धन की प्रतिज्ञा करने की इजाजत देता है. ऐसी संरचना की जाती है जिससे सबसे बड़े समर्थक को सबसे अधिक मूल्य का या सबसे अनोखा पुरस्कार दिया जाता है. क्राउडफंडर, किकस्टार्टर ऐसे इनाम-आधारित क्राउडफंडिंग प्लैटफार्म के उदाहरण हैं.

3. इक्विटी-आधारित क्राउडफंडिंग – Equity based

इक्विटी क्राउडफंडिंग थोड़ा अलग होता है. आम तौर पर इससे पैसे उठाने वाले बिज़नेस पहले से थोड़ा स्थापित होते हैं और उनका लक्ष्य बड़ी राशि इकठ्ठा करना होता है. इक्विटी क्राउडफंडिंग स्टार्ट-अप्स, शुरुआती अवस्था वाली कम्पनियों और विकासशील कंपनियों में कुछ इक्विटी के बदले निवेश की सुविधा देता है. इसमें रिटर्न के साथ-साथ रिस्क भी ज़्यादा होता है क्योंकि देखा जाए तो ज्यादातर स्टार्ट-अप्स फ़ेल हो जाते हैं. इसमें लोग ज्यादातर 5-10 साल तक में इन्वेस्टमेंट रिटर्न लक्ष्य को पाने के लिए निवेश करते हैं. ‘क्राउडक्यूब’ ऐसे इक्विटी क्राउडफंडिंग प्लेटफार्म का उदाहरण है.

4. (पी2पी) पीयर टू पीयर लेंडिंग – P2P lending

पी2पी लेंडिंग के प्लैटफॉर्म पर आप लोन ले सकते हैं जिसमें आप अपने लोन की रकम और इंटरेस्ट रेट निर्धारित कर देते हैं. आपकी मांगी हुई रकम को बहुत से लोग मिलकर पूरा कर देते हैं और प्लैटफॉर्म पूरा लोन का पैसा आपको ट्रान्सफर कर देता है. पहले से ही निर्धारित अवधि (ज्यादातर हर महीने) पर आप अपनी किश्त (ईएमआई – EMI) जमा करते रहते हैं जिसको हर एक लोन देने वाले व्यक्ति को उसके दिए हुए पैसे के अनुसार प्लैटफॉर्म द्वारा बाँट दिया जाता है. यह सिलसिला लोन के पूरी तरह खत्म हो जाने तक चलता है. लोन लेने वाले के लिए यह प्रक्रिया बैंक या वित्तीय संस्थानों से लोन लेने जैसा ही है परन्तु इसमें आपको जल्दी और कम कागज़ी कार्यवाही से लोन मिल जाता है. लोन देने वालों के लिए यह बैंक में बचत खाता या फिक्स्ड डिपाजिट जैसा है जहाँ हर महीने थोड़ा-थोड़ा मूलधन इंटरेस्ट के साथ वापस मिलता है. इस प्रक्रिया के सन्चालन के लिए पी2पी लेंडिंग प्लैटफॉर्म लोन लेने वाले से फीस लेते हैं. प्रोस्पर(Prosper), ज़ोपा(Zopa) और लेंडिंग क्लब(Lending Club) ऐसे प्लैटफॉर्म्स के उदाहरण हैं.

ध्यान देने वाली बात

क्राउडफंडिंग के माध्यम से पूँजी इकठ्ठा करने का निर्णय लेने से पहले यह जाँच लेना चाहिए कि क्या यह आपके स्टार्ट अप के लिए सही है. याद रखिये आपका बिज़नेस आइडिया ऐसा होना चाहिए जो आम जनता को समझने में आसानी हो और उनको काफी प्रभावित करे. इसके लिए आपका पिच इतना चमत्कारी होना चाहिए कि लोगों के दिल को छू ले, उन्हें इतना प्रोत्साहित करे कि वे आपके लक्ष्य में आपके साथ हो लें. अगर आपका कांसेप्ट थोड़ा कठिन है और लोगों को उससे जुड़ने में कठिनाई हो रही हो तो क्राउडफंडिंग आपके बिज़नेस के लिए सही रास्ता नहीं होगा.

 

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