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स्टार्टअप के सफर में फंडिंग के मुख्य चरण – Stages of Startup funding in Hindi

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बिज़नेस को idea stage से share market में लिस्ट होने वाली कंपनी बनाने में समय, मेहनत और लगन के साथ-साथ पूँजी का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है. अनेकों अच्छे बिज़नेस पूँजी के अभाव में या तो शुरू ही नहीं हो पाते या शुरू होकर भी किसी न किसी चरण पर पैसों के अभाव में दम तोड़ देते हैं. मुख्य रूप से तीन तरीकों से बिज़नेस की funding हो सकती है.

1- सरकारी अथवा गैर-सरकारी अनुदान (grant) : कुछ क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने के लिए ग्रांट मिल सकता है. यदि आपकी आइडिया ग्रांट मिलने वाले क्षेत्र से है तो आप कोशिश कर सकते हैं परन्तु ग्रांट की राशि आम तौर पर कम होती है जो आइडिया को रिसर्च करने और बुनियादी स्तर पर बिज़नेस शुरू करने तक ही मदद कर पाती है.

2- बिज़नेस लोन  (loan) : आप विभिन्न प्रकार के लोन ले सकते हैं परन्तु यह पैसा देनदार को interest के साथ वापस करना पड़ता है, चाहे कंपनी चले या ना चले.

3- इक्विटी फंडिंग (equity funding): इसमें इन्वेस्टर को पैसों के बदले कंपनी में equity share देना पड़ता है. बिज़नेस के नहीं चलने की स्थिति में इन्वेस्टर को पैसा वापस नहीं करना पड़ता क्योंकि वह कंपनी में हिस्सेदार होता है.

आज हम यहाँ equity funding के विभिन्न चरणों की चर्चा करेंगे.

Different Stages in Startup Funding in Hindi

सेल्फ फंडिंग (self funding ) :

बिज़नेस की शुरुआत उद्यमी खुद का पैसा और मेहनत लगाकर शुरू करता है. इस फंडिंग का amount बहुत छोटा भी हो सकता है जो उद्यमी के financial status पर निर्भर करता है. इस चरण को बूटस्ट्रैपिंग (bootstrapping) भी कहते हैं. इस चरण की अवधि बिज़नेस की परिपक्वता और आपके खुद के investment करने की क्षमता के अनुसार छोटी या बड़ी हो सकती है. इसको ज्यादा समय तक खींच पाने से आपको अपनी कंपनी की हिस्सेदारी किसी बाहरी को नहीं देना पड़ेगा.

मित्रों और परिवार की सहायता ( friends and family ) :

अगर आपको कुछ अधिक धन की आवश्यकता होती है तो आप अपने ख़ास दोस्तों और रिश्तेदारों को संपर्क करके उन्हें अपनी आइडिया में इन्वेस्ट करने को कहते हैं जिसके बदले आप उन्हें बिज़नेस में कुछ equity या convertible preferred stock (जिसे भविष्य में एक निर्धारित समय के बाद कॉमन स्टॉक में परिवर्तित किया जा सकता है) देते हैं. इस स्टेज पर इक्विटी देने का निर्णय बहुत समझदारी से लेना चाहिए क्योंकि अपने बिज़नेस को बढ़ाने के लिए आपको कई स्तर पर फंडिंग की ज़रुरत होती है तथा अनेक इन्वेस्टर आपसे जुड़ सकते हैं और वे अपने योगदान के अनुसार इक्विटी के भागीदार होते हैं. इस चरण में कुल मिलाकर 5% तक इक्विटी देना आदर्शपूर्ण होगा.

सीड कैपिटल या एंजल इंवेस्टर फंडिंग (seed capital or angel investors):

इस चरण में आपके स्टार्टअप को प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केटिंग या फिर टीम बड़ी करने के लिए और पैसों की ज़रुरत होती है जिसके लिए आप अपने मित्रों और परिवार के बाहर कुछ धनवान व्यक्तियों से मदद लेते हैं जिन्हें एंजल इन्वेस्टर्स कहते हैं. एंजेल इन्वेस्टर या तो अकेले या फिर समूह में इन्वेस्टमेंट करते हैं और अक्सर ये किसी ना किसी कंपनी के फाउंडर होते हैं. ज्यादातर एंजेल इन्वेस्टर राउंड में पैसा एक लोन के रूप में दिया जाता है जिसे कनवर्टिबल नोट या ब्रिज लोन कहते हैं जो आगे चलकर वैल्यूएशन तय होने पर इक्विटी में परिवर्तित हो सकता है. यह स्टॉक बेचने के मुकाबले फाइनेंसिंग का एक तेज और सस्ता माध्यम है जिसके लिए आपको valuation सेट करने की ज़रुरत नहीं होती. इस माध्यम से लगभग 1 मिलियन डॉलर से 2  मिलियन डॉलर तक फंडिंग मिल सकती है जिसके बदले में 20% तक की इक्विटी देना उचित होगा. इक्विटी क्राउडफंडिंग (crowdfunding) भी seed capital जुटाने का अच्छा माध्यम है.

developmental stages of startup financing 

सीरीज़ A (Series A funding )

इस चरण तक पहुंचने वाले स्टार्टअप आमतौर पर वे हैं जो अपने प्रोडक्ट या सर्विसेज को स्थापित करके उनके लिए मार्केट को भांप लिये हैं और उन्हें बेचने भी लगे हैं (हालांकि यह ज़रूरी नहीं कि ये कंपनियां मुनाफा कर रही हों) परन्तु उनको बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए और एक ठोस बिज़नेस मॉडल बनाने के लिए capital की ज़रुरत है. सीरीज़ A फंडिंग किसी भी कंपनी के लिए पहला बड़ा venture capital financing होता है. इस चरण में आमतौर पर लगभग 3 मिलियन डॉलर से 5 मिलियन डॉलर तक की फंडिंग 20% – 25% शेयर के बदले होती है.

सीरीज़ B (Series B funding )

सीरीज़ B तक पहुंचने वाली कम्पनियां ज्यादातर ऐसी हैं जिनके बिज़नेस का एक customer base बन गया है और उनके पास एक ऐसा बिज़नेस मॉडल है जो चल पड़ा है इसलिए इस प्रकार की फंडिंग का amount भी बड़ा होता है (10 मिलियन डॉलर से 50 मिलियन डॉलर तक).

कुछ कम्पनियां Series C या Series D funding के लिए भी जाती हैं और हर एक राउंड में इन्वेस्टमेंट की राशि पहले से ज्यादा होती है क्योंकि बिज़नेस बड़ा होने की वजह से valuation बढ़ता रहता है.

वैसे तो आप चाहें तो फंडिंग राउंड चलाते रहें परन्तु ज्यादातर कम्पनियां सीरीज़ B के बाद शेयर मार्केट में लिस्टिंग या किसी बड़ी कंपनी द्वारा ख़रीदे जाने की संभावना तलाशने लगती हैं. शुरूआती निवेशकों को पैसा कमाने का भी अच्छा मौका कंपनी के शेयर मार्केट में आईपीओ (IPO) आने के बाद या किसी कंपनी के ख़रीदे जाने पर ही मिलता है.

Business kahani की राय

ऊपर दिए हुए फंडिंग के चरण जरुरी नहीं है कि हर एक स्टार्ट-अप पर लागू हों. संस्थापक के फाइनेंसियल स्टेटस, किस इंडस्ट्री में बिज़नेस है और इसके विकास की दर पर निर्भर करता है कि आप कौन – कौन से चरण से गुजरेंगे और कौन से बिना छुए आगे निकल जायेंगे. हमारी राय में आपको हमेशा आगे के चरण की फंडिंग की कोशिश जल्दी शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि इस प्रक्रिया में समय लगता है और पैसे के अभाव में बिज़नेस नहीं रुकने देना चाहिये.

 

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