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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले ख़ुदा बंदे से खुद पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है? – Elon Musk story in hindi

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इलॉन मस्क की कहानी

अंतरिक्ष विज्ञान में एक इतिहास तब बना था, जब 1969 में पहली बार नासा के astronaut नील आर्मस्ट्रांग ने चाँद पर कदम रखा था। इस वर्ष 6 फरवरी को एक बार फिर इतिहास लिखा गया जब दुनिया के सबसे बड़े और शक्तिशाली रॉकेट, ‘फॉल्कन हेवी’ (Falcon Heavy) को यू.एस. के फ्लोरिडा शहर में kennedy space centre से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।

गौर करने वाली बात यह है कि इस बार के लॉन्च को नासा जैसे किसी बड़े सरकारी संगठन ने अंजाम नहीं दिया बल्कि एक ऐसे इंसान ने दिया जो अपनी निडर सोच, फौलादी इरादे और दूरदर्शिता से दुनिया को लगातार चौंकाता रहा है।(Who is Elon musk ?)

$90 मिलियन की निजी सम्पत्ति दांव पर लगाकर तैयार किया गया ‘फॉल्कन हेवी’ मंगल ग्रह पर मानव कॉलोनी बसाने के अनोखे सपने को पूरा करने की ओर उठाया गया पहला कदम है। इस अनोखे सपने को देखा है Elon Musk ने और उसे हकीकत में बदलने के उद्देश्य में दिन रात लगी है california स्थित उनकी ‘स्पेस एक्स’ (SpaceX) टीम।

Elon हमें पृथ्वी तक सीमित नहीं रहने देना चाहते बल्कि हमारे लिए अन्य दूसरे ग्रहों तक का रास्ता खोलना चाहते हैं। इतना ही नहीं, इलॉन ने तो मंगल पर ही मरने की अपनी इच्छा को भी जाहिर किया है।

लीक से हटकर सोचना और उसे सच कर दिखाना इलॉन मस्क की ख़ासियत है। फॉल्कन हेवी रॉकेट के लॉन्च के दौरान उन्होंने सामान्य पेलोड (Payload) के स्थान पर अपनी टेस्ला स्पोर्ट्स कार को ही अंतरिक्ष में भेज दिया।

‘Tesla’ जो इलेक्ट्रिक कारों में आज एक विशिष्ट पहचान बना चुका है, उसे बुलंदियों तक पहुँचाने का श्रेय भी इलॉन को ही जाता है और अब वो ‘ड्राइवरलेस कार’ बनाने के सपने को पूरा करने में भी लगे हैं।

दिसंबर 2016 में फ़ोर्ब्स पत्रिका द्वारा जारी की गई संसार के सबसे शक्तिशाली लोगों की सूची में उन्हें 21वां स्थान मिला था। फ़रवरी 2018 तक उनकी कुल संपत्ति 20.80 अरब डॉलर है और Forbes द्वारा उन्हें दुनिया के 53वें सबसे धनी व्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

स्पेसएक्स और टेस्ला के अलावा ‘पे पाल’ (paypal), ‘सोलर सिटी’ (solar city) और ‘द बोरिंग कंपनी’ (The Boring Company) जैसे अन्य दूसरे दिग्गज नामों से जुड़े इलॉन मस्क के बारे में आइए जानते हैं इस बिज़नेस कहानी में।

 Elon Musk Biography In Hindi 

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Elon का बचपन

इलॉन मस्क का जन्म 28 जून 1971 को प्रिटोरिया, साउथ अफ़्रीका में हुआ था। उनके पिता एरोल मस्क (Errol Musk) एक साउथ अफ़्रीकन-ब्रिटिश इंजीनियर, पायलट और नाविक थे। उनकी माँ मेय मस्क (Maye Musk) कैनेडियन मॉडल और डाइटीशियन थीं।

इलॉन ने बचपन से ही कई मुश्किलों का सामना किया। 10 साल की उम्र में उनके माता-पिता का तलाक़ हो गया। उसके बाद उनके पिता ने ही उन्हें पाला। बचपन में अक्सर स्कूल के बच्चे इलॉन को परेशान करते थे और उनके साथ मारपीट भी करते थे।

तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े इलॉन को बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक़ था। 10 साल की उम्र में उन्होंने कंप्यूटर चलाना शुरू कर दिया और 12 साल की उम्र में ख़ुद ही कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखकर इलॉन ने basic coding पर आधारित एक वीडियो गेम, ‘ब्लास्टर’ बनाया, जिसे उन्होंने लगभग 500 डॉलर में एक पत्रिका को बेचा और अपनी व्यवसायिक क्षमता का पहला परिचय दिया ।

बचपन में वो घंटों अपनी कल्पनाओं में कोई नया आविष्कार करने में मग्न रहा करते थे और अक्सर दूसरों को अनसुना कर देते थे। इसी कारण उनके माता-पिता उन्हें बहरा तक समझने लगे थे। हालांकि उन्हें बाद में यह सच पता चला कि इलॉन बहरे नहीं हैं, बल्कि उनका पूरा ध्यान अपनी कल्पनाओं में लगा रहता है।

साउथ अफ़्रीका से अमेरिका तक का सफ़र

साउथ अफ़्रीका की फ़ौज में भर्ती होने से बचने के लिए 1989 में 17 साल की उम्र में इलॉन साउथ अफ़्रीका से कनाडा पहुँच गए। वहाँ स्नातक की पढ़ाई करने के लिए उन्होंने ‘क्वींस यूनिवर्सिटी’ में दाख़िला ले लिया। इस दौरान उन्होंने कनाडा की नागरिकता भी हासिल की। कनाडा में दो साल पढ़ने के बाद इलॉन ने अमेरिका में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिल्वेनिया’ में स्थानांतरण करा लिया और वहाँ फिजिक्स में डिग्री ली। उसके बाद ‘व्हार्टन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस’ से इकोनॉमिक्स में भी डिग्री हासिल की।

पीएचडी छोड़ शुरू कर दी ख़ुद की कंपनी

1995 में इलॉन ने कैलिफ़ोर्निया स्थित स्टैनफ़र्ड यूनिवर्सिटी में अप्लाइड फिजिक्स में पीएचडी में दाख़िला लिया। लेकिन दो दिन बाद ही उसे छोड़कर अपने भाई किम्बल के साथ मिलकर अपनी ख़ुद की वेब सॉफ्टवेयर कंपनी ‘ज़िप2’ (Zip2) शुरू की, जो न्यूज़पेपर पब्लिशिंग इंडस्ट्री के लिए ‘सिटी गाइड’ बनाने और उसकी मार्केटिंग का काम करती थी।

1999 में उन्होंने अपनी उस पहली कंपनी को 300 मिलियन डॉलर से भी ज़्यादा में ‘कॉम्पैक’ (Compaq) को बेचा। इस डील से उन्हें लगभग 22 मिलियन डॉलर की कमाई हुई। उसी साल उन्होंने 10 मिलियन डॉलर का निवेश कर एक अन्य सह-संस्थापक के साथ ऑनलाइन बैंकिंग साइट ‘x.com’ को लॉन्च किया। 2000 में ‘x.com’ अपनी प्रतियोगी कंपनी ‘कॉनफिनिटी’ से मिलकर ‘पेपाल’ (PayPal) बन गई।

स्पेसएक्स (SpaceX) के साथ शुरू हुई असंभव को संभव करने की क़वायद

2002 में जब ईबे (eBay) ने पेपाल (PayPal) को 1.5 बिलियन डॉलर में ख़रीदा, तो इलॉन के हिस्से में तक़रीबन 180 मिलियन डॉलर आये। स्पेस एक्सप्लोरेशन, स्पेस इंजीनियरिंग और वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों में उनकी शुरू से ही ख़ास रुचि थी और अब उनके पास इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए पर्याप्त पूँजी भी थी।

अंतरिक्ष परिवहन की लागत को कम करके मंगल ग्रह पर मानव कॉलोनी स्थापित करने के अपने सबसे बड़े सपने को सच करने के लिए 2002 में इलॉन ने प्राइवेट एयरोस्पेस निर्माता और स्पेस ट्रांसपोर्ट सर्विस कम्पनी, ‘स्पेसएक्स’ (SpaceX – Space Exploration Technologies Corporation) की स्थापना की। इसी साल उन्हें अमेरिका की नागरिकता भी मिली।

स्पेसएक्स प्रोजेक्ट के तहत ऑटोमेटेड ग्रीनहाउस को मंगल तक पहुँचाने की योजना बनाई गई जिसके लिए बड़ी मात्रा में लॉन्च वाहन और स्पेसशिप्स की ज़रुरत थी। लेकिन इन स्पेसशिप्स को खरीदने में आने वाले खर्च को भांपकर इलॉन ने इससे 10 गुने कम खर्च में ही स्पेसएक्स द्वारा पुनः प्रयोग में लाये जाने वाले लॉन्च वाहन और स्पेसशिप्स बनाने का फैसला लिया।

2002 में स्पेसएक्स ने फॉल्कन-1 लॉन्च सिस्टम पर काम करना शुरू कर दिया। इस योजना को फलीभूत होने में चार साल का समय लगा। 2006 में इलॉन ने 100 मिलियन से भी ज़्यादा स्पेसएक्स प्रोजेक्ट में निवेश किया और वहां से शुरू हुआ रॉकेट लॉन्च टेस्टिंग का सिलसिला।

2006-2008 के दौरान स्पेसएक्स के रॉकेट लॉन्च के शुरुआती तीन प्रयास असफ़ल रहे। लेकिन इलॉन ने इन असफ़लताओं के बाद भी हार नहीं मानी। आख़िरकार, 28 सितम्बर 2008 को चौथे प्रयास में फॉल्कन-1 पृथ्वी के orbit में प्रवेश करने में सफ़ल रहा। अगर इस बार ज़रा-सी भी चूक हो जाती तो स्पेसएक्स के बंद होने की नौबत आ जाती। हमेशा की तरह इस बार भी इलॉन ने यह रिस्क लेकर बहुत हिम्मत दिखाई थी और इस बार सफ़लता ने उनका साथ दिया। उनकी इस उपलब्धि से नासा (NASA) भी बहुत प्रभावित हुआ और स्पेसएक्स के स्पेसक्राफ़्ट और रॉकेट का इस्तेमाल करने के लिए उनके साथ 1.6 बिलियन डॉलर का क़रार किया।

इसके बाद कई कंपनियों ने स्पेसएक्स के प्रोजेक्ट्स में रुचि दिखाई और इस तरह इस कंपनी को कई निवेशक मिले। कंपनी अब तक कई रॉकेटों का निर्माण करके उनको सफ़लतापूर्वक लॉन्च कर चुकी है और उनके द्वारा सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुँचाने में क़ामयाब रही है।

स्पेसएक्स का प्रोजेक्ट इलॉन के दिल के इतने करीब है कि वे खुद रॉकेटों को डिज़ाइन भी करते हैं ।  इस तरह इलॉन ‘स्पेसएक्स’ के फाउंडर, सीईओ और लीड डिज़ाइनर भी हैं।

मुश्किल वक़्त में संभाली टेस्ला की बागडोर

इलॉन मस्क इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी ‘टेस्ला’ (Tesla, Inc.) के को-फाउंडर, सीईओ और प्रॉडक्ट डिज़ाइनर भी हैं। टेस्ला मोटर्स की स्थापना के एक साल बाद इलॉन ने इस कंपनी में 70 मिलियन डॉलर का निवेश किया और इसके सह-संस्थापक और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के चेयरमैन बने।

उन्होंने कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक कार, ‘रोडस्टर’ स्पोर्ट्स कार की डिज़ाइनिंग में अहम भूमिका निभाई। 2006 में उन्हें टेस्ला रोडस्टर डिज़ाइन के लिए ग्लोबल ग्रीन प्रॉडक्ट डिज़ाइन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। लेकिन, अगले ही साल इस कार का प्रॉडक्शन शुरू होने से पहले इसकी बेचने की कीमत को लेकर समस्या खड़ी हो गई। इस वज़ह से कार का लॉन्च एक साल से भी ज़्यादा समय के लिए आगे बढ़ाना पड़ा।

यह टेस्ला मोटर्स के लिए बहुत मुश्किल दौर था। इस कठिन समय में इलॉन ने अपने गहन प्रबंधन कौशल का अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए रोडस्टर प्रोजेक्ट को अवरुद्ध करने वाले सभी लोगों को निकाल बाहर किया और ख़ुद कंपनी की बागडोर संभाली। दिवालिया होने की कगार पर पहुँच चुकी ‘टेस्ला’ को बचाने के लिए इलॉन ने लगातार हर संभव प्रयास किये। उन्होंने अपनी तरफ़ से फंडिंग उपलब्ध कराने के साथ ही खर्चों को कम करने पर भी ज़ोर दिया और स्टाफ़ कम करने, कुछ ऑफ़िसों को बंद करने के साथ ही सप्लायर्स से भी दाम कम कराये। उनके प्रयासों का ही नतीज़ा था कि 2008 में टेस्ला रोडस्टर की रिलीज़ संभव हो पाई।
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अन्य कई महत्त्वपूर्ण कंपनियों के साथ भी जुड़े हैं इलॉन

स्पेसएक्स और टेस्ला के साथ ही इलॉन वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों और आर्टिफ़ीशियल इंटेलिजेंस संबंधी कंपनियों और प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े हुए हैं। वे सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली ‘सोलरसिटी’ (SolarCity) के चेयरमैन भी हैं।

साथ ही वे इम्प्लांटेबल ब्रेन कंप्यूटर इंटरफ़ेस विकसित करने वाली कंपनी, ‘न्यूरालिंक’ (Neuralink) के सह-संस्थापक और सीईओ भी हैं। इलॉन आर्टिफ़ीशियल इंटेलिजेंस को मानव जाति के लिए एक संभावित ख़तरे के रूप में देखते हैं। इसलिए इसके इस्तेमाल पर नज़र रखने के लिए बनाई गई एक नॉन-प्रॉफ़िट रिसर्च कंपनी, ‘ओपन एआई’ (OpenAI) के सह-संस्थापक और को-चेयरमैन भी हैं।

स्पेसएक्स और टेस्ला के अलावा इलॉन अन्य कई भविष्यवादी परियोजनाओं से भी जुड़े हैं जैसे हाई स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम ‘हाईपरलूप’ (Hyperloop)। इस प्रोजेक्ट द्वारा एक भूमिगत कैप्सूल बनाया जा रहा है जिससे लॉस एंजिलस से सैन फ्रांसिस्को शहर की 614.44 किलोमीटर की दूरी को 30 मिनट में तय किया जा सकता है। यह कैप्सूल हवाई जहाज से दोगुने गति से चल सकेगा। उनकी ये सभी परियोजनाएं दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। 

Businesskahani की राय

ऐसे अनोखे सपने देखने वाले और उन्हें सच करने के लिए अपनी पूरी जान लगा देने वाले लोग दुनिया में बहुत कम ही हैं। हमें उम्मीद है कि इलॉन मस्क की कहानी को पढ़कर आपके अन्दर जोश भर गया होगा और आपका विश्वास अपने हाथ की लकीरों को खुद लिखने में बढ़ गया होगा। हमेशा याद रखें कि दृढ़ निश्चय, कभी हार ना मानने के जज़्बे, सच्ची लगन और मेहनत के बलबूते असंभव को भी संभव किया जा सकता है।

आज के युग के जीते-जागते शक्तिमान, इलॉन मस्क, की इस कहानी को अपने दोस्तों से जरुर शेयर करें।

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