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बिज़नेस प्लान है व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज – How To Write A Business Plan In Hindi?

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हर नए बिज़नेस या स्टार्टअप की शुरुआत और उसके विकास में बिज़नेस प्लान (Business Plan) की अहम भूमिका होती है। बिज़नेस प्लान एक ऐसा औपचारिक दस्तावेज़ (formal document) होता है जिसमें आपके प्रस्तावित बिज़नेस के उद्देश्य, व्यावसायिक ढांचे, वित्तीय प्रबंधन, योजनाओं और उनके क्रियान्वयन के साथ ही आपके व्यवसाय के भविष्य सम्बंधी सभी विवरण शामिल होते हैं। बिज़नेस प्लान को इसके इस्तेमाल और अपेक्षित श्रोतागणों के आधार पर ‘लोन प्रपोज़ल’, ‘वेंचर प्लान’ अथवा ‘इन्वेस्टमेंट प्रॉस्पेक्टस’ आदि कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। यह दस्तावेज़ दस पन्नों से लेकर सौ पन्नों तक का भी हो सकता है।

Important Information About Writing An Effective Business Plan In Hindi

किसी भी बिज़नेस के लिए क्यों ज़रूरी है बिज़नेस प्लान?

बिज़नेस प्लान किसी भी व्यवसाय के परिचालन के साथ ही उसके वित्तीय उद्देश्यों को रेखांकित कर उसकी सफ़लता का नक्शा तैयार करता है। यह किसी भी व्यवसाय के उचित प्रबंधन और विकास के लिए सबसे आवश्यक साधन है। इसके माध्यम से उद्यमी को अपने व्यवसाय की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करके अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए आवश्यक क़दम उठाने में मदद मिलती है। बिज़नेस प्लान की मदद से ही कंपनी के उच्च अधिकारी अपने व्यवसाय, योजनाओं और लक्ष्यों का विवरण अपने अन्य सहयोगियों के साथ साझा करते हैं और इसी के आधार पर ही व्यवसाय की उन्नति के लिए परिस्थति के अनुसार उचित निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।

कोई भी निवेशक आपके स्टार्टअप या व्यापार में निवेश करने से पहले आपके बिज़नेस प्लान के माध्यम से ही आपके व्यवसाय की मौजूदा स्थिति, प्रबंधन, योजनाओं, और भविष्य की संभावनाओं का मुआयना करता है। इसलिए अगर आप कोई स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं तो आपके पास बिज़नेस प्लान का होना ख़ास तौर पर ज़रूरी है। यह न केवल आपके स्टार्टअप के लिए फाइनेंस जुटाने का सबसे कारगर माध्यम है बल्कि यह आपको नए बिज़नेस एसोसिएट्स से जोड़ने का भी काम करता है। इससे आपको अपने व्यवसाय के प्रबंधन के साथ ही एक अच्छी टीम बनाने में भी मदद मिलती है। यही कारण है कि किसी भी कंपनी और उसके बोर्ड के सदस्यों के साथ ही परामर्शदाताओं, बैंकों, निवेशकों और सरकारी एजेंसियों को भी किसी न किसी रूप में आपके बिज़नेस प्लान में दिलचस्पी रहती है। इसलिए किसी भी नये व्यवसाय को शुरू करने या स्थापित व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए आपके पास एक उम्दा बिज़नेस प्लान का होना बहुत ज़रूरी है।

बिज़नेस प्लान बनाने से पहले थोड़ा होमवर्क भी है ज़रूरी

यह तो अब आप जान ही चुके हैं कि बिज़नेस प्लान आपके स्टार्टअप या व्यापार के लिए कितना ज़रूरी है। अब अगर आप अपना बिज़नेस प्लान तैयार करने के बारे में सोच रहे हैं तो इसके लिए आपको पहले थोड़ा होमवर्क करना होगा। सबसे पहले आप यह विचार करें कि आप जो व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या वर्तमान में कर रहे हैं, उसका उद्देश्य और लक्ष्य क्या है। अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आप कौन से जरुरी कदम लेंगे। इसके बाद आप अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति और भावी संभावनाओं एवं उद्देश्यों को चिन्हित करें। अगर आपको भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है तो आप किस माध्यम से वित्त प्रबंधन करेंगे। इसका कारण है कि वित्तीय मदद पाने के सभी माध्यमों के क़ायदे और कानून हैं।

अपने अलावा इस बिज़नेस प्लान में रूचि रखने वाले सभी संस्थानों को ध्यान में रखते हुए मैनेजमेंट टीम, मार्केटिंग रणनीति, उपभोक्ता, बाज़ार, प्रतिस्पर्धा, वित्तीय प्रबंधन एवं लाभ सम्बंधी पहलुओं पर विचार करना चाहिए। उसके बाद अपने बिज़नेस प्लान का एक ड्राफ़्ट बनाना चाहिए और अपने इस डॉक्यूमेंट से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही इसे अंतिम रूप (final form) प्रदान करना चाहिए।

बिज़नेस प्लान की रूपरेखा

भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यवसायों एवं उद्देश्यों के अनुसार ही उनके लिए बनाये जाने वाले बिज़नेस प्लानों में भी भिन्नता होती है। लेकिन सभी परिस्थितियों में बिज़नेस प्लान का बुनियादी ढांचा और उद्देश्य समान ही होता है। बिज़नेस प्लान को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है – व्यवसाय अवधारणा (Business Concept), बाज़ार अनुभाग (Marketplace Section) और वित्तीय अनुभाग (Financial Section)।

बिज़नेस प्लान के पहले भाग ‘बुनियादी व्यवसाय अवधारणा’ में आप अपने व्यवसाय, व्यापारिक ढांचे, उत्पाद या सेवा का विवरण देते हैं। साथ ही, इसमें आप यह भी बताते हैं कि अपने बिज़नेस को सफ़ल बनाने के लिए आपके पास कौन-सी योजनाएँ हैं। इसके बाद ‘बाज़ार अनुभाग’ में आप बाज़ार की स्थिति का विश्लेषण करते हैं। इसमें आप अपने संभावित उपभोक्ताओं और प्रतिस्पर्धियों का विश्लेषणात्मक विवरण उपलब्ध कराते हैं। बिज़नेस प्लान के तीसरे भाग में आप अपने व्यवसाय की वित्तीय स्थिति का वर्णन करते हैं। इन तीन भागों पर विस्तारपूर्वक काम करने के लिए आप बिज़नेस प्लान को निम्न सात भागों में तैयार कर सकते हैं –

  1. कार्यकारी सारांश (एग्जीक्यूटिव समरी/Executive Summary)
  2. व्यापार विवरण (बिज़नेस डिस्क्रिप्शन/Business Description)
  3. बाज़ार रणनीतियाँ (मार्केट स्ट्रैटेजीस/Market Strategies)
  4. प्रतिस्पर्धी विश्लेषण (कॉम्पिटीटिव एनालिसिस/Competitive Analysis)
  5. डिज़ाइन एवं विकास योजना (डिज़ाइन & डिवेलपमेंट प्लान/Design & Development Plan)
  6. संचालन एवं प्रबंध योजना (ऑपरेशन्स & मैनेजमेंट प्लान/Operations & Management Plan)
  7. वित्तीय कारक (फाइनेंशियल फ़ैक्टर्स/Financial Factors)

कौन करता है बिज़नेस प्लान की प्लानिंग?

 अक्सर लोग यह सोचते हैं कि बिज़नेस प्लान बेहद फॉर्मल डॉक्यूमेंट होता है इसलिए इसे लिखने के लिए विशेषज्ञों की ही सर्विस लेना आवश्यक होता है। यह बात सही है कि बिज़नेस प्लान एक फॉर्मल डॉक्यूमेंट है लेकिन आपके बिज़नेस, उद्देश्य, लक्ष्यों और चुनौतियों को आप सबसे बेहतर समझते हैं और यह डॉक्यूमेंट आपके विचारों और प्लानिंग का ही एक लिखित रूप होता है। कोई भी विशेषज्ञ आपके लिए बिज़नेस प्लान लिखने से पहले आपसे यह सभी जानकारी जरूर मांगेगा इसलिए बेहतर है कि आप पहले ख़ुद ही अपने बिज़नेस प्लान की रूपरेखा तैयार करें। इससे आपको अपने व्यवसाय से जुड़े हर एक पहलू पर गौर करने का मौका मिलेगा। किसी भी कंपनी में बिज़नेस प्लान की रूपरेखा प्रायः उच्चाधिकारियों या मैनेजमेंट टीम द्वारा ही बनाई जाती है। एक बार ड्राफ़्ट बनाने के बाद उसे अंतिम रूप देने के लिए आप विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं।

बिज़नेस प्लान को समयसमय पर अपडेट करना चाहिये

 एक बार बिज़नेस प्लान बनाकर रख देने से ही आपका काम ख़त्म नहीं होता। इसे समय-समय पर अपडेट करते रहना भी ज़रूरी होता है। समयानुसार जब भी अपनी योजनाओं और रणनीतियों में कुछ बदलाव करते हैं तब उसका विवरण आपको अपने बिज़नेस प्लान में भी देना होता है। इससे आपको अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए आवश्यक प्रयासों और योजनाओं की जानकारी रहती है।

बिज़नेस प्लान और इन्वेस्टर पिच डेक में क्या अंतर है?

अनेक लोगों के मन में यह असमंजस होता है कि बिज़नेस प्लान (Business Plan) और इन्वेस्टर पिच डेक (Investor Pitch Deck) में क्या फ़र्क़ होता है। और कुछ लोगों को तो यह ग़लतफ़हमी भी होती है कि ये दोनों एक ही डॉक्यूमेंट के दो अलग-अलग नाम हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि दोनों में थोड़ा नहीं, बहुत ज़्यादा फ़र्क़ होता है।

बिज़नेस प्लान एक 10-100 पन्नों का डॉक्यूमेंट होता है जबकि इन्वेस्टर पिच डेक  केवल 10-20 स्लाइडों तक ही सीमित रहता है। बिज़नेस प्लान में आपकी कंपनी की सारी संभव जानकारी लिखित रूप में शामिल होती है। यह प्रायः एक वर्ड डॉक्यूमेंट होता है। दूसरी ओर, पिच डेक में लिखित शब्दों का इस्तेमाल कम-से-कम होता है और उनकी जगह विज़ुअल्स का इस्तेमाल ज़्यादा होता है। यह एक विज़ुअल प्रेजेंटेशन होती है। पिच डेक आप अपने संभावित इन्वेस्टर, पार्टनर या क्लाइंट से पहली मीटिंग करने के लिए भेजते हैं। जबकि बिज़नेस प्लान किसी के पास तब भेजा जाता है जब कोई आपसे ख़ुद उसे मांगता है या फिर निवेशक आपकी कंपनी में निवेश करने का इच्छुक हो और आपसे आपके बिज़नेस की विस्तृत जानकारी लेने चाहता हो।

बिज़नेस प्लान तैयार करते समय ना करें ये ग़लतियाँ

बात जब बिज़नेस प्लान तैयार करने की आती है तो कुछ उद्यमी ऐसी ग़लतियाँ करते हैं जिनके कारण उन्हें बहुत नुक़सान उठाना पड़ता है। इसलिए ध्यान रखें कि बिज़नेस प्लान बनाते समय ज़रा भी लापरवाही ना बरतें और अगर आप अपना बिज़नेस प्लान बनाने की तैयारी कर रहे हैं तो ये ग़लतियाँ बिल्कुल ना दोहराएं।

  1. सबसे पहली ग़लती जो अक्सर उद्यमी करते हैं वो यह कि वे बिज़नेस प्लान की आवश्यकता को अनदेखा कर देते हैं। उनका यह मानना है कि उन्हें तो बिज़नेस प्लान की कोई ज़रुरत ही नहीं है क्योंकि इस दस्तावेज़ का इस्तेमाल तो केवल व्यापार के लिए फंड जुटाने के लिए ही किया जाता है। जबकि असलियत यह है कि बिज़नेस प्लान केवल किसी व्यवसाय के लिए पूँजी जुटाने का माध्यम नहीं होता बल्कि यह व्यवसाय को सुचारु रूप से चलाने और तय लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है।
  2. कुछ उद्यमी अपने बिज़नेस प्लान में सबसे ज़्यादा ज़ोर केवल अपने प्रोडक्ट की विशेषताएं बताने पर ही देते हैं और ऐसा करने के कारण वे सबसे अहम सवाल को अनदेखा कर देते हैं कि उपभोक्ता को उनके प्रोडक्ट की क्या ज़रुरत है? कोई भी व्यक्ति उनका उत्पाद क्यों उपयोग में लाना चाहेगा? और अगर उनके जैसा प्रोडक्ट पहले से ही मार्केट में उपलब्ध है तो कोई उनका प्रोडक्ट क्यों ख़रीदेगा? इन सभी सवालों के ज़वाब पर प्रोडक्ट की बिक्री कहीं ज़्यादा निर्भर करती है।
  3. बिज़नेस प्लान बनाते समय कई बार उद्यमी केवल अनुमानों के आधार पर अपने लक्ष्य, योजनाएं एवं प्रबंधन का निर्धारण करते हैं जो सरासर ग़लत है। अनुमानों पर आधारित योजनाएं उद्यमी को उसके व्यवसाय और बाज़ार की वास्तविक स्थिति और आवश्यक प्रयासों से अवगत कराने में सक्षम नहीं होती। ऐसी परिस्थितियों में किसी भी व्यवसाय का सफ़ल होना केवल कल्पना में ही संभव होता है। इसलिए बिज़नेस प्लान बनाने से पहले आपको अपने व्यवसाय और बाज़ार की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाना ज़रूरी है और उसके अनुसार ही अपने व्यवसाय के लिए उचित रणनीति बनानी चाहिए।
  4. बिज़नेस प्लान आपके व्यवसाय के वर्तमान का ही नहीं बल्कि भविष्य का भी आईना होता है। इसलिए इस दस्तावेज़ को बनाते समय सिर्फ़ अपने व्यवसाय के निकट भविष्य पर ध्यान केंद्रित ना रखें। अपने व्यवसाय की शुरुआत के साथ ही इस बात पर भी विचार करें कि अगले 5-10 वर्षों में आप अपने बिज़नेस को कहाँ देखना चाहते हैं।

बिज़नेस प्लान लिखने के लिए भारत में उपलब्ध संसाधन

अगर आप बिज़नेस प्लान लिखने के लिए जानकारी इकठ्ठा करना चाहते हैं तो भारत में आपके लिए अनेकों उपयोगी संसाधन उपलब्ध हैं जो इस संबंध में आपका उचित मार्गदर्शन करेंगे। भारत सरकार की ‘राष्ट्रीय ई-शासन योजना’ के तहत संचालित ‘भारत का व्यापार पोर्टल – business.gov.in’ एक ऐसा विशिष्ट पोर्टल है जिस पर व्यापार संबंधी सभी संभव जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त आप ‘स्टार्टअप इंडिया’ (Startup India) के पोर्टल ‘startupindia.gov.in’ पर ‘लर्निंग एंड डिवेलपमेंट’ सेक्शन में जाकर ‘स्टार्टअप इंडिया लर्निंग प्रोग्राम’ (Startup India Learning Program) को भी ज्वाइन कर सकते हैं। इसमें आपको बिज़नेस प्लान तैयार करने की जानकारी के साथ ही स्टार्टअप से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण सूचनाएं भी मिलेंगी। साथ ही आप व्यापार से संबंधित अन्य ऑनलाइन पोर्टल्स, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कानूनी सलाहकार, बिज़नेस सलाहकार, अनुभवी व्यवसायी और बिज़नेस कहानी की टीम को भी संपर्क करके इस विषय में जानकारी जुटा सकते हैं।

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