व्यापार मंत्र

अपने बिज़नेस का मूल्यांकन (valuation) बढ़ायें – ध्यान रखकर इन बातों का

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अगर आप भावी इन्वेस्टर (Potential Investor) से बात करना चाहते हैं तो स्वाभाविक है कि आप अपनी कंपनी का सही मूल्यांकन करना चाहेंगे ताकि आपको अपने शेयर का सही दाम मिले. ज्यादातर स्टार्टअप को शुरूआती दिनों में अपना मूल्यांकन (business valuation) करने में चुनौती का सामना करना पड़ता है. एक कंपनी जो अभी कुछ खास कमाई नहीं कर रही है या कुछ दिनों से ही बाज़ार में आयी है, उसके मूल्यांकन का कोई स्थापित फार्मूला नहीं होता है परन्तु बिज़नेस शुरू करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखने से मूल्यांकन (company valuation) बढ़ाया जा सकता है.

नये बिज़नेस का मूल्यांकन (valuation) बढ़ायें

१- प्रतिभावान और संतुलित टीम: एक स्टार्ट अप टीम में हर एक सदस्य का बहुत महत्व होता है. संस्थापकों और कर्मचारियों के उत्साह, अनुभव और कौशल का सही संतुलन बनाने से कंपनी का मूल्यांकन बढ़ता है. टीम के हर एक सदस्य की योग्यता और प्रतिबद्धता से मूल्यांकन में करोड़ों रुपये की बढ़ोत्तरी हो सकती है इसलिए बिज़नेस शुरू करते समय टीम का गठन बहुत ही बुद्धिमानी से करें और अच्छे कर्मचारी को शेयर या स्टॉक ऑप्शन (Stock Option) देने में झिझक नहीं दिखायें क्योंकि आपका इन्वेस्टर सभी सदस्यों की दीर्घकालीन प्रतिबद्धता (Long Term Commitment) देखना चाहेगा.

 २- बौद्धिक सम्पदा (Intellectual Property): अगर आपको लगता है कि आपके प्रोडक्ट, सॉफ्टवेयर या इसको बनाने की कला को पेटेंट किया जा सकता है तो इसको जल्दी से जल्दी कर देना चाहिये. कंपनी के पास पेटेंट रहने से उसका मूल्यांकन बहुत बढ़ जाता है क्योंकि इन्वेस्टर को दिखता है कि प्रतिस्पर्धा (Competition) की कम संभावना रहेगी और कंपनी की सफलता के आसार बढ़ेंगे.

 ३- शुरूआती ग्राहक और कंपनी की आय (Revenue): एक बात का हमेशा ख्याल रखें कि आपका ग्राहक और कंपनी की आय, बिज़नेस करने के सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं क्योंकि बिज़नेस की स्थापना ग्राहक के लिए ही हुई है तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक ही आय का स्रोत है. आपको जल्दी से जल्दी ग्राहक लाने पर और कंपनी की आय बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि बिज़नेस का मूल्यांकन बढ़ सके.

नये बिज़नेस का मूल्यांकन (valuation) बढ़ायें

४- प्रतिस्पर्धा और प्रवेश अवरोध (Entry Barrier): आपका भावी इन्वेस्टर इस बात को बहुत ध्यान से सोचेगा कि आपके बिज़नेस को दूसरी कितनी कंपनियां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चुनौती दे सकती हैं और नए प्रतिस्पर्धियों को आने में कितना अवरोध है. नवीनतम सोच, टेक्नोलॉजी के उपयोग और ग्राहकों की पसंद का ख्याल रखने से आप इस चुनौती को कम कर सकते हैं और कंपनी का मूल्यांकन बढ़ा सकते हैं.

५- बाज़ार का साइज़ (Market Size) और संभावित विकास: आप जिस मार्केट को टारगेट कर रहें हैं, उसके साइज़ और विकास की संभावना का भी मूल्यांकन पर गहरा प्रभाव पड़ता है इसलिए अगर आपकी टारगेट मार्केट ज्यादा बड़ी नहीं है तो इस बात को सोच सकते हैं कि प्रोडक्ट का विस्तार करके अलग-अलग प्रकार के प्रोडक्ट बनायें या फिर अन्य बाजारों में जाने की रणनीति पर सोचें, जिसमें दूसरे देशों में एक्सपोर्ट (Export) करने की संभावना भी शामिल है.

६- भौतिक सम्पत्ति (Physical Assets): चल और अचल संपत्तियाँ जैसे कि प्लांट, मशीनरी, ऑफिस बिल्डिंग, कंप्यूटर इत्यादि का भी मूल्यांकन पर असर पड़ता है इसलिए अगर आपके बिज़नेस के लिए यह सब जरूरी है तो इसको अर्जित (Acquire) करने पर भी विचार करते रहें.

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