प्रेरणादायक कहानियाँ

भारतीय मसालों और अचार का असल स्वाद अमेरिका के घरों में पहुँचाने वाले – Patel Brothers की कहानी

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अपने सपनों को पूरा करने की ख़्वाहिश हो या किसी अच्छी नौकरी की तलाश, किसी न किसी कारण हर दिन लाखों लोग अपनी जन्भूमि, अपना घर, गाँव, शहर या देश छोड़ दूर कहीं किसी दूसरी जगह जाकर बसते हैं।

ऐसा कहना तो बहुत आसान है लेकिन करना बहुत ही मुश्किल। अपनी जड़ों से दूर कहीं जाकर अपना बसेरा बनाना कोई आसान बात नहीं।

आज से कई दशक पहले जब राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सब कुछ आज के जितना विकसित और आधुनिक नहीं था, उस दौर में भारत से अमेरिका जाकर बसना और वहाँ अपना ख़ुद का व्यवसाय स्थापित करना तो शायद सपनों में भी असंभव लगता होगा।

Inspiring Story Of Famous Indian Grocery Stores in USA – Patel Brothers In Hindi

लेकिन वो कहते हैं न, “इंसान अगर करना चाहे, तो कुछ भी असंभव नहीं”। यू.एस.ए. की सबसे बड़ी, सबसे पुरानी और लोकप्रिय भारतीय किराना श्रृंखलाओं (Indian Grocery Chains) में से एक ‘पटेल ब्रदर्स’ (Patel Brothers USA) के संस्थापक मफ़त पटेल (Mafat Patel) और तुलसी पटेल (Tulsi Patel) इसका बेहतरीन उदाहरण हैं।

कई दशक पहले अमेरिका में जाकर बसने वाले, मूल रूप से गुजरात के निवासी, पटेल भाइयों ने अपने व्यापारिक और नैतिक मूल्यों से वहाँ अपने साथ-साथ अपने देश और संस्कृति की भी एक ख़ास पहचान कायम की है।

गुजरात के एक गाँव से अमेरिका तक का सफ़र

गुजरात के मेहसाणा ज़िले के भांडू गाँव में एक किसान परिवार में जन्मे मफ़त भाई पटेल ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के बाद एमबीए करने का मन बनाया। 1968 में उन्हें यू.एस.ए. स्थित इंडियाना यूनिवर्सिटी में एमबीए की पढ़ाई करने के लिए वीज़ा मिला और इसके साथ ही शुरू हुआ एक नया सफ़र।

छह भाई-बहनों में सबसे बड़े, मफ़त भाई ने 23 साल की उम्र में पहली बार अपने देश से बाहर क़दम रखा और यू.एस.ए. जा पहुँचे। तब शायद उन्होंने यह सोचा भी नहीं होगा कि यू.एस.ए. का यह सफ़र आने वाले समय में उनके जीवन की दिशा और दशा दोनों ही बदल देगा।

अपनेपन की कमी से मिला एक शानदार बिज़नेस आइडिया

इंडियाना में एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद मफ़त भाई ने शिकागो का रुख़ किया। वहाँ उन्होंने सबसे पहले जेफ़र्सन इलेक्ट्रिकल कंपनी को बतौर क्वालिटी कंट्रोल इंजीनियर ज्वाइन किया। लेकिन शिकागो में प्रवास के दौरान उन्हें हमेशा अपनेपन की कमी महसूस होती थी जिसका सबसे बड़ा कारण वहाँ का खाना था।

अमेरिकी खाने के स्वाद में वो अपनापन नहीं था जो अपने देश के खाने में हुआ करता था। उन्हें यह अहसास हुआ कि उनकी ही तरह वहाँ रहने वाले अन्य भारतीयों को भी इस बात की कमी ख़लती थी।

उन दिनों अमेरिका में भारतीय खाद्य पदार्थ केवल कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध हुआ करते थे और वो भी बहुत महँगे दामों पर। इसलिए उन्हें ख़रीद पाना वहाँ रहने वाले हर भारतीय के लिए संभव नहीं था।

मफ़तभाई ने इस समस्या का समाधान सोचना शुरू किया और तब उनके मन में अपनी एक छोटी-सी किराने की दुकान (Grocery Store) खोलने का विचार आया जिसमें भारतीय खाद्य पदार्थ और मसाले एक ही जगह आसानी से उपलब्ध हों। इस बिज़नेस आइडिया के साथ ही मफ़त भाई ने ख़ुद का व्यापार करने की ठान ली।

क़िस्मत ने दिया साथ और इस तरह पड़ी पटेल ब्रदर्स की नींव 

जहाँ चाह, वहाँ राह। इस बात को सच करते हुए मफ़तभाई की ज़िन्दगी में उस समय एक ख़ास मोड़ आया जब 1971 में रमेश त्रिवेदी नामक एक व्यवसायी शिकागो में स्थित अपनी दुकान बेचने के इरादे से उनसे मिले।

मफ़त भाई के लिए अपनी योजना पर काम करने का यह सुनहरा मौका था। अब बस उन्हें उस दुकान को ख़रीदने के लिए पर्याप्त पूँजी जुटानी थी।

उन्होंने अपने भाई तुलसी पटेल और भाभी अरुणा से इस बारे में बात की। मफतभाई की मदद करने के लिए तुलसीभाई और अरुणाबेन भी अमेरिका आ गए और आपसी सहमति के बाद दोनों भाइयों ने अपनी सारी जमा-पूँजी इकठ्ठा करके वह दुकान ख़रीद ली।

इसके बाद शुरू हुई अपनी किराने की दुकान खोलने की तैयारी। दोनों भाइयों को सारा इंतज़ाम करने में तीन साल लग गए। आख़िरकार सितम्बर, 1974 में शिकागो के डेवॉन एवेन्यू में 900 वर्ग फ़ुट की उस दुकान में ‘पटेल ब्रदर्स’ के नाम से उनके पहले किराना स्टोर का शुभारम्भ हुआ।

हाथ से मिले हाथ तो बनती है बात

शुरूआत में मफ़तभाई, तुलसीभाई और भाभी अरुणा ही मिलकर इस स्टोर को सम्भालते थे। सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक स्टोर पर रहने के बाद दोनों भाई अलग से काम करने भी जाते थे। मफ़त भाई की शादी होने के बाद उनकी पत्नी चंचलबेन ने भी उनका भरपूर साथ दिया और उनकी प्रेरणास्त्रोत बनीं।

पटेल परिवार की यह छोटी-सी शुरुआत रंग लाई और उनका यह बिज़नेस चल निकला। जैसे-जैसे काम बढ़ता गया, काम करने वालों की ज़रुरत भी बढ़ती गई। तब मफ़त भाई ने अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी एक-एक करके अपने पास अमेरिका बुला लिया।

आज के समय में पटेल परिवार की पाँच पीढ़ियाँ इस व्यवसाय से जुडी हुई हैं। ‘पटेल ब्रदर्स’ को एक सफ़ल व्यवसाय का रूप देने में पूरे पटेल परिवार का योगदान रहा है।

इतने बड़े व्यवसाय को सम्भालने के साथ ही 300 से ज्यादा सदस्यों वाले अपने पूरे परिवार को भी एकजुट रखना मफ़त भाई की कई शानदार ख़ूबियों में से एक है।

पटेल ब्रदर्स बना एक जाना-पहचाना ब्रांड

समय के साथ ‘पटेल ब्रदर्स’ की लोकप्रियता बढ़ी और धीरे-धीरे पूरे अमेरिका में इसकी कई शाखाएं खुलीं। इसके साथ ही ‘पटेल ब्रदर्स’ भारतीय किराना श्रृंखला के रूप में अमेरिका का एक नामी ब्रांड बनकर उभरा।

1990 में ‘पटेल ब्रदर्स’ की फ़्रेंचाइज़ी बतौर ‘राजा फ़ूड्स’ की शुरुआत हुई और 1992 में ‘स्वाद’ नामक ब्रांड के अंतर्गत ताज़े एवं प्री-पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और भारतीय व्यंजनों की भी बिक्री शुरू हुई।

44 वर्षों से भी ज़्यादा समय की कठिन मेहनत, बेहतरीन ग्राहक सेवा और नैतिक मूल्यों का ही नतीज़ा है कि आज पूरे अमेरिका के 18 राज्यों में patel store की 55 शाखाएँ हैं।

कभी एक छोटे-से किराना स्टोर से शुरू हुआ ‘पटेल ब्रदर्स’ का यह शानदार सफ़र आज लगभग 14 करोड़ डॉलर के व्यवसाय में तब्दील हो चुका है।

दूर रहकर भी भूले नहीं मिट्टी के प्रति अपना फर्ज़

पटेल ब्रदर्स के संस्थापक मफ़त भाई पटेल और उनके परिवार के अन्य सदस्य व्यवसाय के क्षेत्र में कार्यरत होने के साथ ही अपने देश और सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े हुए हैं। मफ़त भाई ने मेहसाणा में एक अस्पताल का निर्माण कराया है। उनके द्वारा भारत में स्थापित ‘संवेदना फाउंडेशन’ यहाँ समाज सेवा का काम करती है। वे ‘इंडियन अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ नामक एनजीओ के बोर्ड मेंबर भी हैं जो निर्धन और ज़रूरतमंद लोगों के लिए काम करता है।

Business Kahani की राय

मफतभाई और पटेल ब्रदर्स की कहानी से बिज़नेस का बहुत बड़ा ज्ञान मिलता है। आज के समय में बिज़नेस की आधुनिक शिक्षा देने वाले अनुभवी शिक्षक और सलाहकार बूटस्ट्रैपिंग (Bootstrapping – अपने पास उपलब्ध संसाधनों से व्यापार की नींव डालने और उसके फ़ायदे) पर बहुत जोर देते हैं ताकि एक स्टार्टअप की ठोस शुरुआत हो सके। रमेश त्रिवेदी से दुकान खरीदकर तीन साल तक उसको शुरू करने के लिए तैयारी करना और फिर उसको शुरू करके वर्षों तक अपने से चलाते हुए दोनों भाइयों का बाहर जाकर नौकरी करना बूटस्ट्रैपिंग का उम्दा उदाहरण है। अपने बिज़नेस, परिवार और समाज को एक साथ प्यार के बंधन में बांधकर रखने का मफतभाई और पटेल ब्रदर्स का प्रयत्न काबिले-ए-तारीफ़ है।

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