प्रेरणादायक कहानियाँ

आपके पैरों में है बिजली, चल कर जला सकते हैं बिजली का बल्ब

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हमने कोयला, पानी, सूरज की रोशनी और हवा से बिजली बनाने के बारे में सुना था परन्तु पैदल चलने से स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ बिजली भी बन सकती है, ऐसा तो पहली बार सुना है. बचपन में हम नानी और दादी की कहानियों में बहुत सारे चमत्कारी हीरो और विलेन के बारे में सुन चुके हैं जैसे कोई मुंह से आग निकालता था तो कोई पैर मार कर जमीन को दो टुकड़ों में कर देता था परन्तु अब हम भी कुछ ऐसे चमत्कार कर सकते हैं – चल-चल कर बिजली बना सकते हैं.

यू.के. की पेवजेन (Pavegen) नाम की एक कंपनी ने ऐसा टाइल बनाया है जिससे बने हुए फर्श पर चलने से बिजली पैदा होती है. जैसे ही लोग फर्श पर चलते हैं, उनके पैरों का वजन टाइल के नीचे बने हुए एक flywheel (उड़न चक्र) को घुमाता है जो कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के माध्यम से ऊर्जा पैदा करता है. Pavegen tiles त्रिकोणीय है और इसके सभी कोनों में जनरेटर हैं जो फ्लाईव्हील को घुमाते हैं. यह फ्लाईव्हील ठीक उसी तरह काम करता है जैसे कि पानी या कोयले से बिजली बनाने में टरबाइन का प्रयोग होता है. पेवजेन की V3 नामक टाइल प्रति कदम 5 वाट की बिजली उत्पन्न कर सकती है जो कि कम वोल्टेज की स्ट्रीट लाइट जलाने के काम आ सकती है.

दुनिया भर में फैलता हुआ पेवजेन का बिज़नेस

पेवजेन ने दुनिया के करीब २०० जगहों पर टाइल्स की स्थापना की है.

  • 2012 के लन्दन के ओलिंपिक खेलों में, लन्दन के वेस्ट हैम अंडरग्राउंड स्टेशन पर पेवजेन के टाइल लगाये गए
  • 2013 में , पेरिस मैराथन के फिनिश लाइन पर 178 पेवजेन टाइल लगाये गए जिसमे करीबन 40 हजार धावकों ने भाग लिया
  • 2015 में, नाइजीरिया के लेगोस शहर के एक फुटबॉल पिच पर 100 टाइल्स लगे जहाँ खिलाड़ियों के कदमों से स्टेडियम के फ्लडलाइट्स को बिजली मिलती है और वहां अब रात में भी मैच खेला जा सकता है.
  • नई स्थापनाओं में अमेरिका के वाशिंगटन शहर के डुपोंट सर्किल पर तकरीबन 100 टाइल्स लगे हैं. हम आपको बता दें कि डुपोंट सर्किल अमेरिका के राष्ट्रपति के सरकारी निवास ‘व्हाइट हाउस’ के ठीक सामने है.
  • एक स्थापना लन्दन के ऑक्सफ़ोर्ड स्ट्रीट में भी है. ऑक्सफ़ोर्ड स्ट्रीट लन्दन का बहुत मशहूर स्ट्रीट है जहाँ रोजाना 85,000 से भी ज्यादा लोग आते हैं. पूर्वी लन्दन के फेमस शौपिंग मॉल ‘वेस्ट फील्ड शॉपिंग सेंटर’ में भी पेवजेन की टाइल्स लगी है.
  • इसके अलावा जो दूसरे महत्वपूर्ण जगहों पर पेवजेन की टाइल्स लगी है उनमें लन्दन का हीथ्रो एअरपोर्ट और मशहूर स्टोर, हैरड्स शामिल हैं.

पेवजेन के डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, कोरिया, सिंगापुर, थाईलैंड, पुर्तगाल, जापान और भारत में हैं. पेवजेन की वेबसाइट के अनुसार भारत के बैंगलूरु शहर में यूनाइटेड सस्टेनेबल डेवलप्मेंट्स नाम की कंपनी पेवजेन का प्रतिनिधित्व करती है.

बिजली बनाने से भी ज्यादा उपयोगी

बिजली पैदा करने के साथ-साथ पेवजेन की स्मार्ट टाइल्स pavegen technology के द्वारा  उस पर चलने वालों का डाटा भी एकत्रित करती है और उसको कहीं दूर रखे कंप्यूटर को भेज सकती है जैसे कि टाइल्स के ऊपर चलने वाला व्यक्ति कौन है, उसका लोकेशन क्या है और वह कितने कदम चला है. पेवजेन को बहुत भरोसा है कि ऐसा डाटा रिटेल की कंपनियों के बहुत काम आएगा जो कि वास्तविक समय में अपने कस्टमर का मूवमेंट ट्रैक कर पायेंगी. इसके अलावा पेवजेन एक ऐसा मोबाइल ऐप बना रही है जो टाइल्स पर चलने वालों को एक डिजिटल पैसा एकत्रित करने का साधन देगा जिसको लोग अपने खरीदारी में डिस्काउंट के लिए या फिर किसी अच्छे काम, जैसे की दान देने के लिए उपयोग कर सकते हैं मतलब एक तरह से अपने कदमों से बनाई हुई बिजली के बदले आपको पैसा भी मिल सकता है.

पेवजेन एक और नई सोच के ऊपर काम कर रहा है जिसमें लोग अगर किसी विज्ञापन के बिलबोर्ड के सामने से गुजरें तो पेवजेन की टाइल्स उनको पहचान लेगी और बिलबोर्ड पर उनसे सम्बंधित विज्ञापन दिखायेगी जैसे कि एक नौजवान पुरुष को शेविंग किट का विज्ञापन दिखा सकती है और उस टाइल्स पर चलकर कमाया हुआ डिजिटल पैसा उस वस्तु को खरीदने में उपयोग किया जा सकता है.

पेवेजेन की स्मार्ट आइडिया के जन्मदाता 

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पेवजेन के संस्थापक और सीईओ का नाम Laurence kemball-cook है जो एक इंडस्ट्रियल इंजिनियर हैं. लॉरेंस को 23 वर्ष की उम्र में पेवजेन का आइडिया 2009 में यूनिवर्सिटी में पढ़ते समय आया और उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ इसके ऊपर काम शुरू कर दिया.

शुरुआत के दिनों में लॉरेंस ने लगभग 150 से भी ज्यादा इन्वेस्टर्स को कांटेक्ट किया परन्तु सभी जगह से उनको निराश होना पड़ा क्योंकि किसी को भी ऐसी टाइल्स बना पाने का विश्वास नहीं हुआ जो बिजली पैदा कर सकती है. फिर भी लॉरेंस ने हिम्मत नहीं हारी और पूरी आस्था और आत्मविश्वास के साथ काम करते रहे. दोस्तों  और परिवारवालों की मदद से पहला टाइल बनाया और फिर आगे बढ़ते चले गए. शुरू के दिनों में ना बोलने वाले बहुत से इन्वेस्टरों ने बाद में पेवजेन में पैसा डाला और आज कंपनी का मूल्यांकन लगभग 200 करोड़ रुपए है.

Business kahani की राय

पेवजेन की टेक्नोलॉजी काइनेटिक एनर्जी हार्वेस्टिंग  से सम्बंधित है जो कि शरीर से निकली हुई उर्जा  को पावरिंग एप्लीकेशन की तरफ भेजता है. इस टेक्नोलॉजी का उपयोग आजकल की ‘इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स’ की दुनिया में बहुत बढ़ रहा है. पेवजेन के नये तरीके की स्मार्ट टाइल्स, डाटा एकत्रित करने की नई क्षमता और डिजिटल करेंसी देने का विचार, इस कंपनी को उज्जवल भविष्य प्रदान करने की तरफ महत्वपूर्ण कदम हैं. नए तरीके से उर्जा का स्रोत पूरी मानवता (और पर्यावरण) के लिए बहुत ही अच्छी खबर है.

हम उम्मीद करते हैं कि आप सभी पढ़ने वालों को इस बिज़नेस कहानी से प्रेरणा मिलेगी और आप भी अपनी आइडिया से हमारे समाज के उत्थान के लिए काम करेंगे. कृपया अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को यह कहानी शेयर करना ना भूलें, हो सकता है आपका यह छोटा सा कदम हमारे हिंदीभाषी क्षेत्र से एक बड़ी कंपनी की शुरुआत करा दे.

आपके कमेंट्स का हम हमेशा ही स्वागत करते हैं. हमें बताईये कि आपको पेवजेन की आइडिया कैसी लगी? पेवजेन की टाइल्स हमारे हिंदीभाषी क्षेत्र में कहाँ-कहाँ लग सकती है और आप कौन-कौन से नए उर्जा के स्रोत के बारे में सोच सकते हैं?

 

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