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रहीम के दोहे – Rahim Ke Dohe And Startup – चुनिन्दा दोहों से स्टार्टअप के लिए अच्छी सीख

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रहीम के दोहे – Rahim ke dohe पीढ़ियों से सभी को प्रेरणा देते आये हैं। हम सभी ने इन दोहों को बचपन से पढ़ा या सुना है। आज हम कुछ चुनिन्दा दोहों का विश्लेषण स्टार्टअप (Startup) के सन्दर्भ में करेंगे और देखेंगे कि कैसे संस्थापक, निवेशक तथा स्टार्टअप से जुड़े हुए अन्य लोग इनसे सीख ले सकते हैं।

रहीम दास जी के जन्म का नाम अबदुर्ररहीम खानखाना था और वो सन् 1556 में लाहौर में पैदा हुए थे। उनके पिता का नाम बैरम खाँ और माँ का नाम सुल्ताना बेग़म था। उनके पिता बैरम खाँ महान सम्राट अकबर के अभिभावक और संरक्षक थे।

Startup Lessons From Rahim Ke Dohe In Hindi 

 

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून।।

अर्थ – रहीम दास जी के इस दोहे में पानी शब्द का 3 अलग-अलग मतलब है – 1. पानी = प्रतिष्ठा 2. पानी = चमक 3. पानी = जल। इंसान को पानी यानि प्रतिष्ठा बनाये रखना चाहिए क्योंकि पानी के बिना तो मोती और चूने का भी महत्व नहीं रहता।

स्टार्टअप के लिए सीख: रहीम के इस दोहे के अनुसार बिज़नेस में साख (Goodwill) का बहुत महत्व है। अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, निवेशकों और समाज के बीच बिज़नेस की प्रतिष्ठा बनाये रखने का निरंतर प्रयास करना चाहिए। साख के बिना बिज़नेस को कभी भी आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

 

देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन।

लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन।।

अर्थ  रहीम दास जी कहते हैं कि इस संसार में हमको सब कुछ देने वाला कोई और है, वो ईश्वर दिन रात हमको देता ही रहता है। परन्तु हमलोग इस भ्रम में रहते हैं कि सब कुछ हम ही कर रहे हैं।

स्टार्टअप के लिए सीख: रहीम के इस दोहे के अनुसार एक स्टार्टअप को सफलता देने वाले उसके ग्राहक होते हैं इसलिए पूरी टीम को अपने उत्पाद और सेवाओं को ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रख कर बनाना चाहिए। इस भ्रम में कभी भी ना रहें कि ग्राहक के अलावा कोई और आपके बिज़नेस को सफ़ल बना सकता है।

 

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।

रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय।।

अर्थ  रहीम दास जी कहते हैं कि उन कामों पर ध्यान देना चाहिए जिनको करने से मुख्य उद्देश्य को पूरा किया जा सकता है। इधर-उधर ध्यान भटकाने से आपको कुछ भी हासिल नहीं होगा। जैसे पेड़ की जड़ को सींचने से पूरा पेड़ फलता-फूलता है जबकि फल, फूल या पत्तियों को सींचा जाए तो पेड़ सूख जायेगा।

स्टार्टअप के लिए सीख: एक स्टार्टअप के संस्थापकों को भी अपना मुख्य उद्देश्य हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। हर समय उन कामों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिनको पूरा करने से बिज़नेस की नींव सुदृढ़ बने और विकास में तीव्रता आये।

 

 

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।

अर्थ  रहीमदास जी कहते हैं कि ऐसे बड़े होने का क्या मतलब जिससे किसी का भला ना हो। जैसे खजूर का पेड़ बड़ा तो बहुत होता है लेकिन उससे न किसी को छाया मिल पाती है और दूर होने की वजह से फल भी तोड़ना मुश्किल होता है।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार स्टार्टअप को अपने बिज़नेस की संरचना (Business Model) का चुनाव सोच समझ कर करना चाहिए। ऐसी संरचना का चुनाव ना करें जिससे ग्राहकों को सेवा लेने में मुश्किल हो और कंपनी को कमाई करने में दिक्कत का सामना करना पड़े।

सही सरंचना के साथ उचित माध्यम (ऑनलाइन या ऑफलाइन) द्वारा सेवा प्रदान करने से ग्राहकों को संतुष्टि मिलती है और बिज़नेस में वृद्धि भी होती है।

 

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।

कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।

अर्थ रहीमदास जी कहते हैं कि पेड़ अपने फल खुद नहीं खाता और समुद्र अपना पानी खुद नहीं पीता। इसी प्रकार सज्जन लोग हमेशा दूसरों के लिए जीते हैं और संपत्ति भी केवल परोपकार के लिए ही जोड़ते हैं।

स्टार्टअप के लिए सीख:  इस दोहे के अनुसार एक अच्छा संस्थापक हमेशा दूसरों के भले के लिए बिज़नेस को आगे बढ़ाता है। उसके मन में हमेशा बिज़नेस को आगे बढ़ाकर समाज, कर्मचारी, ग्राहक और निवेशकों का भला करने की भावना होती है।

ऐसी भावना रखने वाले संस्थापकों को अपने बिज़नेस से बहुत लगाव भी रहता है क्योंकि उनको अपने काम का महत्व समझ में आता है और वो बाधाओं से विचलित नहीं होते।

 

टूटे सुजन मनाइए, जो टूटे सौ बार।

रहिमन फिरि-फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार।।

अर्थ  रहीम दास जी कहते हैं कि जैसे किसी माला के टूट जाने पर हम फिर से मोती पिरोकर उसे जोड़ लेते हैं, वैसे ही प्रियजनों को चाहे वो सौ बार ही क्यों ना रूठें मना लेना चाहिए।

स्टार्टअप के लिए सीख:  इस दोहे से हमको यह सीख मिलती है कि एक स्टार्टअप को अपने ग्राहकों को कभी नाराज नहीं करना चाहिए। यदि कंपनी के उत्पाद या सेवाओं से ग्राहक नाखुश हैं तो उनसे फीडबैक (Feedback) लेकर समस्या का निवारण कर लेना चाहिए।

 

रहिमन जिह्वा बाबरी, कह गई सरग-पताल।

आपु तु कहि भीतर गई, जूती खात कपाल।।

अर्थ  रहीम दास जी कहते हैं कि इंसान को सदैव बड़ा ही सोच समझ कर बोलना चाहिये। यह जीभ जो बावली है, कटु शब्द कहकर मुंह के अंदर छिप जाती है और उसका परिणाम बेचारे सर को जूता खाकर भुगतना पड़ता है।

स्टार्टअप के लिए सीख:  इस दोहे के अनुसार एक स्टार्टअप को कंपनी के अन्दर और बाहर संवाद (communication) पर बहुत ध्यान देना चाहिए। मार्केटिंग और पब्लिक रिलेशन को अच्छे से संभालने से बिज़नेस को अच्छी पहचान मिलती है। इस क्षेत्र में गलती करने की सजा एक स्टार्टअप के लिए काफी भारी पड़ सकती है।

 

रहिमन ओछे नरन ते, भलो बैर ना प्रीति।

काटे-चाटे स्वान के, दुहूँ भाँति बिपरीति।।

अर्थ  रहीम दास जी इस दोहे में कहते हैं कि बुरे लोगों से ना तो मित्रता अच्छी है और ना ही दुश्मनी। जैसे कुत्ता चाहे गुस्से में काटे या फिर प्यार से तलवे चाटे, दोनों ही परिस्थितियाँ कष्टदायी होती हैं।

स्टार्टअप के लिए सीख:  इस दोहे के अनुसार एक स्टार्टअप को अपने सम्बन्ध हमेशा अच्छे लोगों से बनाने की कोशिश करनी चाहिए। एक अच्छा सह-संस्थापक, कर्मचारी, पार्टनर, निवेशक या मेन्टर आपके बिज़नेस को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होता है लेकिन बुरे लोगों का साथ आपकी मेहनत को बर्बाद करने में देर नहीं लगाता।

 

रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय।

नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय॥

अर्थ  रहीमदास जी कहते हैं कि आप किसी भी जगह अपना मन लगा के तो देखिये, आपको सफलता जरूर मिलेगी। इंसान अगर अच्छी नीयत से प्रयास करे तो नारायण को भी वश में किया जा सकता है।

स्टार्टअप के लिए सीख:  इस दोहे के अनुसार एक स्टार्टअप को पूरी एकाग्रता के साथ अपनी आइडिया को एक सफल बिज़नेस के रूप में स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए। पूरे मन से मेहनत करने पर ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियाँ आपको सफ़ल बनाने में एकजुट हो जाती हैं।

 

रहिमन चुप हो बैठिए, देखि दिनन के फेर।

जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर।।

अर्थ  रहीमदास जी कहते हैं कि बुरे वक़्त में सब्र से काम लेना चाहिए क्योंकि दिन फिरने में समय नहीं लगता। जब अच्छे दिन आते हैं तो बिगड़ी बातें बहुत तेजी से ठीक हो जाती हैं।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार एक स्टार्टअप को शुरूआती दिनों में धैर्य से काम लेना चाहिए क्योंकि एक बार मजबूत शुरुआत हो जाने के बाद जब बिज़नेस में तेजी आती है तो बड़ा नाम बनाने में ज्यादा देर नहीं लगती।

 

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।

टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाय।।

अर्थ  रहीम दास जी कहते हैं कि आपसी प्रेम और परस्पर सहयोग की भावना के धागों को कभी टूटने मत दीजिये। क्योंकि अगर एक बार धागा टूट जाता है तो दोबारा जोड़ने पर उसमें गाँठ पड़ जाती है।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार सह-संस्थापकों को आपसी प्रेम हमेशा बनाए रखना चाहिए क्योंकि आपस में मन-मुटाव होने पर बिज़नेस का रास्ता कठिन होने लगता है। सह-संस्थापकों के आपसी झगड़े की वजह से दुनिया के अनगिनत बिज़नेस बर्बाद हुए हैं।

 

माली आवत देख के, कलियन करे पुकारि।

फूले फूले चुनि लिये, कालि हमारी बारि॥

अर्थ  रहीमदास जी कहते हैं कि माली को आते देखकर कलियां कहती हैं कि आज तो उसने खिले हुए फूल चुन लिए परन्तु कल हमारी बारी आएगी क्योंकि कल हम भी खिलकर फूल हो जाएंगे।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार स्टार्टअप को कभी भी स्थापित व्यवसायों (प्रतिस्पर्धियों – Competitors) के पास ग्राहकों की भीड़ देखकर घबराना नहीं चाहिए। यदि आप ठीक तरह से बिज़नेस का निर्माण करेंगे तो आने वाले समय में आपका भी बिज़नेस बड़ा बनेगा और ग्राहकों की भीड़ लगेगी।

 

रहिमन देख बड़ेन को, लघु ना दीजिये डारि।

जहा काम आवे सुई, का करी है तरवारि।।

अर्थ  रहीम दास जी कहते हैं कि बड़ी वस्तु को देखकर छोटी चीजों को फेंक नहीं देना चाहिए क्योंकि जो काम सुई कर सकती है वो काम तलवार से नहीं हो सकता।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार स्टार्टअप को अपनी टीम का गठन मिली-जुली योग्यता के लोगों के साथ करना चाहिए क्योंकि विभिन्न योग्यता के लोग टीम को संतुलित बनाते हैं और हर तरह की परिस्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं।

 

जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं।

गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं।।

अर्थ  रहीम दास जी कहते हैं कि किसी बड़े को अगर छोटा भी कह दिया जाए तो इससे बड़े का बड़प्पन नहीं घटता। जैसे गिरिधर श्री कृष्ण को मुरलीधर कहने से उनकी महिमा में कोई फ़र्क नहीं पड़ता है।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार संस्थापकों को किसी भी आलोचना से विचलित नहीं होना चाहिए। यदि आपका आइडिया और बिज़नेस अच्छा है तो कोई उसकी आलोचना करके उसे  ख़राब नहीं बना सकता।

अपने बिज़नेस के उद्देश्य को ध्यान में रखकर लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और सही तरीके से लक्ष्य को पाने की कोशिश करनी चाहिए। आलोचकों का मुँह अपने आप ही बंद हो जाएगा।

 

समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात।

सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात।।

अर्थ  रहीमदास जी कहते हैं कि हर चीज़ समय आने पर ही होती है। समय आने पर ही वृक्ष पर फल लगता है और समय आने पर वह पेड़ से झड़ भी जाता है। समय कभी एक जैसा नहीं रहता इसलिए दुःख के समय शोक नहीं करना चाहिए क्योंकि सुख भी समय आने पर ही आएगा।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार संस्थापकों को बिज़नेस के शुरूआती दिनों में हताश नहीं होना चाहिए क्योंकि हर एक प्रयास के सफल होने का सही समय होता है। समय के साथ आपका बिज़नेस जरुर बड़ा और सफल बनेगा इसलिए कभी भी निराश होकर काम ना बंद करें।

 

दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं।

जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के माहिं।।

अर्थ  रहीमदास जी कहते हैं कि सज्जन पुरुष और कुपुरुष दोनों देखने में एक ही जैसे लगते हैं लेकिन व्यवहार और वाणी से उनकी असल पहचान हो जाती है। जैसे कौआ और कोयल देखने में एक ही जैसे होते हैं लेकिन बसंत ऋतु में कोयल की मधुर आवाज से दोनों में फर्क नजर आ जाता है।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार अच्छे और बुरे निवेशक एक जैसे ही लगते हैं परन्तु उनसे बार-बार मिलकर बात करने से उनकी मंशा और काबिलियत का पता चल जाता है। संस्थापकों को सिर्फ बाहरी दिखावे पर नहीं जाना चाहिए क्योंकि आर्थिक सहायता लेने से पहले निवेशक की सही पहचान आवश्यक है। एक सही निवेशक ही बिज़नेस को आगे बढ़ाने में मदद कर पायेगा।

 

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे होय।।

अर्थ  रहीमदास जी कहते हैं कि दुःख में सभी लोग भगवान को याद करते हैं परन्तु सुख के समय शायद ही किसी को भगवान याद आते हैं। यदि मनुष्य सुख में भी भगवान का स्मरण करे तो उसे दुःख होगा ही नहीं।

स्टार्टअप के लिए सीख: इस दोहे के अनुसार स्टार्टअप को हमेशा अपने बिज़नेस के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए और खास करके जब बिज़नेस अच्छे से चल रहा हो क्योंकि बुरे वक़्त में बिज़नेस को बढ़ाना काफी चुनौतियों भरा होता है। यदि सही समय पर ही कदम बढ़ा लिया जाए तो किसी भी संभावित खतरे को कम किया जा सकता है।

 

आपको Rahim ke dohe का यह विश्लेषण कैसा लगा ? क्या आपको रहीमदास जी का कोई और दोहा याद आता है जिसके अर्थ में स्टार्टअप के लिए प्रेरणा और सीख छुपी है ? ऐसे दोहे हमसे जरुर शेयर करें।

 

 

 

 

 

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