प्रेरणादायक कहानियाँ

दुनिया भर में कॉपीकैट बिज़नेस बनाने वाली जर्मन कंपनी – रॉकेट इन्टरनेट

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दुनिया भर के सामानों की नक़ल बनाने के लिए चीन मशहूर है परन्तु बिज़नेस की नक़ल (Clone) बनाने वाली कंपनी का मुख्यालय जर्मनी के बर्लिन शहर में है. मार्क, ओलिवर और एलेक्स सैमवेर नाम के तीन भाइयों की कंपनी Rocket Internet का business model बहुत ही अलग है, जिसमें पूरे विश्व में (खास करके अमेरिका में) इन्टरनेट पर शुरू होने वाले सशक्त बिज़नेस आइडिया पर नज़र रखी जाती है, उनका विश्लेषण (analyze) किया जाता है और उनमें से कुछ कंपनियों का चुनाव करके बहुत ही तेज गति से कॉपीकैट कंपनी दूसरे देशों में शुरू कर दी जाती हैं, जहाँ असली कंपनी अभी तक नहीं पहुँच पाई है. रॉकेट इन्टरनेट पूरी मेहनत और लगन के साथ इन कॉपीकैट कंपनियों के बिज़नेस को बढ़ाता है और इस कोशिश में रहता है कि जब असली कंपनी इन देशों में आये तो रॉकेट अपने कॉपीकैट बिज़नेस उनको बेच सके. तीनों भाइयों में से बीच वाला भाई Oliver Samwer रॉकेट का सीईओ है जो अपने तेज दिमाग, कड़े अनुशासन और जीत की भूख के लिए पूरे विश्व में मशहूर है.

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सैमवेर बन्धुयों को कॉपीकैट बिज़नेस से पहली सफलता 1999 में मिली जब उन्होंने इन्टरनेट पर सामान खरीदने – बेचने और नीलामी की मशहूर वेबसाइट, ईबे, की हुबहू वेबसाइट, एलान्डो, की शुरुआत जर्मनी में की और दो महीने के अन्दर ईबे से 43 मिलियन अमेरीकी डॉलर (लगभग 280 करोड़ रुपये) में बेचने का करार कर लिया. अगस्त 2000 में, उन्होंने जाम्बा (Jamba) नाम की कंपनी शुरू की जो मोबाइल फ़ोन पर पिक्चर, गेम्स और म्यूजिक देती थी. वेरिसाइन (Verisign) नाम की बड़ी कंपनी ने जाम्बा को 273 मिलियन अमेरीकी डॉलर (लगभग 1,774.5 करोड़ रुपये) में वर्ष 2004 में खरीद लिया.

इन शुरूआती सफलताओं से सैमवेर बन्धुओं को अपने भविष्य के बिज़नेस का फार्मूला मिल गया और 2007 में, रॉकेट इन्टरनेट की शुरुआत हुई जिसका मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन कॉपीकैट बिज़नेस बनाना था. 2014 में, रॉकेट इन्टरनेट ने अपना आईपीओ जारी किया और फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज पर इसके शेयर्स की ट्रेडिंग शुरू हो गयी. आज रॉकेट इन्टरनेट के पास 100 से भी ज्यादा कम्पनियां हैं जो विश्व के 110 देशों में चल रही हैं और इसमें लगभग 28,000 लोग काम करते हैं.

कैसे चलती है यह क्लोन फैक्ट्री ?

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रॉकेट के बिज़नेस में क्लोन करने का काम मशीन जैसा होता है और एक ही फार्मूले से सभी नई कम्पनियां शुरू की जाती हैं. जैसा कि रॉकेट के नाम से पता चलता है, बहुत तेज गति से अपनी कंपनियों को बढ़ाकर नए बाज़ार में सबसे पहले स्थापित करना इनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है. रॉकेट के अन्दर, एक टीम है जो हर समय पूरी दुनिया में शुरू होने वाले बिज़नेस आइडिया को खोजती रहती है, टारगेट आइडिया का चुनाव होने के बाद एक ग्रुप, संभावित बाज़ारों को ढूंढता है और एक बिज़नेस प्लान तैयार किया जाता है.

यह बिज़नेस प्लान रॉकेट के मैनेजमेंट को दिखाया जाता है और ग्रीन सिग्नल मिलते ही तेजी से काम शुरू हो जाता है. रॉकेट अपने महत्वाकांक्षी युवा कर्मचारियों को काम पर लगा देता है जो कि मार्केटिंग, इंजीनियरिंग और अकाउंटिंग जैसे विभागों में एक्सपर्ट होते हैं. नई कंपनी को कुछ महीनों में बड़ा करने के लिए खूब मेहनत और ढेर सारा पैसा खर्च किया जाता है. जब नई कंपनी अपने पैरों पर खड़ी हो जाती है तो अपने कर्मचारी नियुक्त कर लेती है और हेड ऑफिस के कर्मचारियों को वापस कर देती है जिससे हेड ऑफिस की वह टीम दूसरी कंपनी की शुरुआत पर लग सके. रॉकेट के पास ऐसी बहुत सी टीमें हैं क्योंकि एक साथ दर्जनों बिज़नेस की शुरुआत का काम चलता रहता है और रॉकेट हर समय टॉप मैनेजमेंट कॉलेजों, बैंकों और कंसल्टेंसी कंपनियों से नए कर्मचारियों की नियुक्ति करता रहता है.

इन सभी कंपनियों के अपने सीईओ, सीओओ और सीऍफ़ओ होते हैं जिनको रॉकेट सह-संस्थापक भी बोलता है क्योंकि इनको अपनी-अपनी कंपनी में सह-संस्थापक के रूप में शेयर मिलते हैं. रॉकेट के सीईओ, ओलिवर सैमवेर, नियमित रूप से इन सभी कंपनियों के Performance की जाँच लगभग 800 बिन्दुओं पर करते हैं जो कि प्रॉफिट, खर्चे और कस्टमर की वृद्धि से जुड़े हुए हैं,  इससे ओलिवर को पता चलता है कि किस कंपनी में कब और कहाँ पैसा डालना है या किस पर ब्रेक लगाना है.

रॉकेट का खट्टा – मीठा सफ़र

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रॉकेट का अब तक का सफ़र काफी उतार – चढ़ाव वाला रहा है, इनकी कुछ कम्पनियां बहुत अच्छे से चल रही हैं परन्तु कुछ बहुत ही जल्दी बंद हो गईं. रॉकेट का काम करने का तरीका भी ज्यादातर विवादों में घिरा रहा क्योंकि इनकी कॉपीकैट स्टाइल बहुत से लोगों को नैतिक रूप से ठीक नहीं लगती है. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि रॉकेट, कंपनी शुरू करने में एक्सपर्ट है परन्तु उसको चलाने में नही. पिछले कुछ सालों में बहुत से पुराने कर्मचारियों ने रॉकेट छोड़ दिया जिससे कंपनी के इमेज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. पुराने कर्मचारियों ने रॉकेट छोड़ने के बाद अन्दर की बहुत सी समस्याओं का उल्लेख किया है जिसमें रॉकेट का कर्मचारियों को युद्ध स्तर पर काम करवाना, कंपनी की सफलता में ठीक से भागीदारी नहीं देना और ओलिवर का कड़ा रुख शामिल है. आप लोगों को शायद पता होगा कि रॉकेट का सफ़र भारत में भी उतना अच्छा नहीं रहा है, जबांग और फ़ूडपांडा जैसे कुछ उदाहरण हैं जो अपनी समस्याओं के लिए बहुत सुर्खियों में रहे.

इन सभी विवादों के बावजूद, रॉकेट पूरी स्पीड के साथ आगे बढ़ रहा है और इसको बहुत सारे बड़े निवेशकों का सपोर्ट है जो रॉकेट की रणनीति में पूरा भरोसा रखते हैं. अभी भी रॉकेट की 100 से ज्यादा कंपनियां चल रही हैं और 28,000 लोग यहाँ काम करते हैं.

Business kahani की राय

वैसे देखा जाए तो एक ही आइडिया पर बहुत सी कंपनियां चलती हैं जैसे कि कार बनाने की इतनी कंपनियां हैं और मूल रूप से सभी का आइडिया एक ही है, कार बनाना. परन्तु ये सभी कंपनियां बहुत से बिन्दुओं पर एक-दूसरे से बहुत ही अलग हैं. शायद जिस स्तर पर रॉकेट कॉपीकैट बिज़नेस बनाता है उसकी संख्या देखकर लोगों को सही नहीं लगता परन्तु यह अपने आप में बहुत ही  काबिलियत की बात है. हमारे भारत में भी, फ्लिपकार्ट या ओला जैसी कंपनियों ने बाहर के देशों के सफल कॉन्सेप्ट को कॉपी किया परन्तु उनकी काबिलियत लोकल मार्केट के अनुसार बिज़नेस बनाने में है. कहते हैं कि कोई भी सफल बिज़नेस बनाने में आइडिया का सिर्फ 5% योगदान होता है और 95% इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करता है. इसलिए अगर आप के पास कोई आइडिया है या आप हमारे किसी कहानी से प्रेरित होकर बिज़नेस करना चाहते हैं तो बेझिझक जानकार लोगों से बात करें जो आइडिया को परिपक्व बनाने और इसके क्रियान्वन में आपकी मदद कर सकें.

याद रखिये, हर सफल खिलाड़ी के पास एक अच्छा कोच होता है परन्तु सफलता का श्रेय खिलाड़ी को ही जाता है. आप भी जल्दी से अपने कोच की तलाश में निकल जाईये और सफलता की तरफ एक और कदम बढ़ाइये.

अरे एक मिनट, कोच की तलाश में निकलने से पहले हमारी इस कहानी को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से शेयर तो कर दीजिये, हम आपके बहुत आभारी रहेंगे.

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