प्रेरणादायक कहानियाँ

एक इंजीनियर ने बनाया ऐसा मील रिप्लेसमेंट जो आपके पूरे खाने को ही कर देगा रिप्लेस

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परिवर्तन प्रकृति का नियम है और बदलते वक़्त के साथ हमारे आस-पास भी बदलावों का सिलसिला लगातार जारी है। इनमें से कुछ बदलाव ऐसे हैं जिन्होंने हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी को या यूँ कहें कि हमारे पूरे लाइफ़स्टाइल को ही बदल दिया है। दरअसल हम बात कर रहे हैं भोजन की। हम सभी जानते हैं कि भोजन हमारी सबसे बड़ी और मूलभूत ज़रूरतों में से एक है। यू.एस.ए के एक इंजीनियर ने भोजन का एक आसान हल खोज निकाला है, ‘सोयलेंट’ (Soylent), जो न केवल पौष्टिक है बल्कि आपके समय और पैसे की बचत भी करता है। आइये आज की बिज़नेस कहानी में जानते हैं, ‘सोयलेंट’ (Soylent) और इसे बनाने वाले ‘रॉब राइनहार्ट’ (Rob Rhinehart) के बारे में –

Healthy Meal Replacement – SOYLENT

क्या है सोयलेंट?

अपने किचन से ब्रेक लेने या एक दिन खाना नहीं बना पाने का अक्सर एक ही विकल्प निकलता है कि बाहर से खाना खरीदा जाए जो न केवल सेहद के लिए हानिकारक साबित हो सकता है बल्कि हमारी जेब पर भी भारी पड़ता है। ऐसे में अगर आपके पास एक ऐसा विकल्प हो जो चुटकी में आपकी और आपके परिवार वालों की भूख ही न मिटाए बल्कि घर में बनने वाले खाने के खर्च से भी कम पैसों में पौष्टिकता से भरपूर एक सम्पूर्ण आहार प्रदान करे तो आप ज़रूर उसे आज़माना चाहेंगे। जी हाँ, ऐसा ही एक मील रिप्लेसमेंट है सोयलेंट।

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कैलिफ़ोर्निया में लॉस एंजिलिस स्थित ‘रोज़ा फ़ूड्स’ नामक कंपनी इसका निर्माण करती है। यह मानव शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों का एक संतुलित मिश्रण है जिसे स्टार्च तथा चावल एवं मटर से प्राप्त होने वाले प्रोटीन के पाउडर, ऑलिव ऑयल और रॉ केमिकल पाउडरों को मिलाकर बनाया जाता है। सोयलेंट पाउडर और तरल पेय पदार्थ (रेडी टू ड्रिंक बोतल) दोनों ही रूपों में उपलब्ध है। पाउडर को आप निर्देशानुसार निश्चित अनुपात में पानी में मिलाकर पी सकते हैं।

आप अपने नियमित भोजन के स्थान पर किसी भी समय इसका सेवन कर सकते हैं और अगर आप चाहें तो इसे पूरी तरह से अपना खाना भी बना सकते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि आप अपने रोज़ाना के खाने में केवल सोयलेंट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। आपको इसके अलावा कुछ और खाने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी और आपका स्वास्थ्य भी दुरुस्त रहेगा। पौष्टिक होने के साथ ही यह आपके दैनिक भोजन से सस्ता भी है। इसके साथ ही यह भिन्न-भिन्न भोजन सामग्री ख़रीदने, खाना बनाने, खाने, और उसके बाद साफ़-सफ़ाई करने में लगने वाले समय की बचत भी करता है।

क्यों और कैसे बना सोयलेंट?

सोयलेंट बनकर तैयार होने के पीछे की कहानी बहुत ही दिचस्प है। दिसम्बर 2012 में, सैन फ्रांसिस्को में एक छोटे से अपार्टमेंट में तीन युवा दोस्त एक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप पर काम कर रहे थे। उनका प्रोजेक्ट, जो एक सस्ता सेल फ़ोन टावर्स बनाने के आइडिया पर आधारित था, फ़ेल हो चुका था और इनक्यूबेटर द्वारा प्रोजेक्ट के लिए मिला फंड भी अब ख़त्म हो रहा था। उन्होंने पैसे पूरे खत्म होने तक सॉफ्टवेयर की नयी-नयी आइडियाज पर काम करते रहने की ठानी। ऐसे में सबसे ज़रूरी बात यह थी कि उनका खुद के रहने-खाने पर खर्च कम से कम हो ताकि बचा पैसा ज़्यादा दिन तक आइडिया पर लगाया जा सके। जब तीनों ने मिलकर बजट बनाना शुरू किया तो पाया कि घर के किराए के अलावा सबसे अधिक ख़र्च खाने पर हो रहा था। साथ ही खाना लाने, बनाने और खाने में बहुत समय भी लगता था। खाने की समस्या उन्हें इस तरह परेशान करने लगी कि वे इस बात को ही कोसने लगे कि उन्हें जीने के लिए खाना पड़ता है। घर में खाना बनाना उनके लिए समय की बर्बादी थी और बाहर का खाना पैसे की फिजूलखर्ची और सेहद के लिए हानिकारक। तब उन तीनों में से एक रॉब राइनहार्ट ने खाने की इस समस्या का समाधान ढूँढना शुरू किया।

राइनहार्ट का उद्देश्य खाने का एक सरल, सुलभ और उम्दा विकल्प खोजना था। इसके लिए उन्होंने सॉफ्टवेयर पर काम रोककर न्यूट्रीशनल बायोकेमिस्ट्री पर आधारित कई किताबें पढ़ डालीं। साथ ही उन्होंने एफ.डी.ए, यू.एस.डी.ए और इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिसिन की वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारी भी पढ़ी। इसके बाद उन्होंने 35 पोषक तत्वों की एक सूची तैयार की। राइनहार्ट ने इन सभी पोषक तत्वों को गोलियों और पाउडर के रूप में इकठ्ठा किया और उन्हें ब्लेंडर में पानी के साथ मिलाकर अपने किचन में एक के बाद एक नया एक्सपेरिमेंट करना शुरू कर दिया।

राइनहार्ट ने अपने रूममेट्स के साथ मिलकर विज्ञान और तकनीक के मेल से एक ऐसा मिश्रण बनाया जिसे कभी भी आसानी से बनाकर पीया जा सकता था। इस मिश्रण का नाम उन्होंने ‘सोयलेंट’ रखा।

राइनहार्ट सोयलेंट पीकर जिन्दा रहने लगे और बहुचर्चित हुए

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अपने एक्सपेरिमेंट को लेकर राइनहार्ट के दिल में इतना प्यार था कि खाने की जगह राइनहार्ट ने रोज़ाना इस मिश्रण को ही पीना शुरू कर दिया। अब उनका एक महीने का खाने का ख़र्च 400 डॉलर से घटकर केवल 70 डॉलर रह गया था। लगातार एक महीने तक सोयलेंट का सेवन करने के बाद उन्होंने अपना अनुभव अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट में रीडर्स के साथ साझा किया। उनकी यह पोस्ट इतनी लोकप्रिय हुई कि कुछ ही समय में सोयलेंट लोगों के बीच चर्चा और उत्सुकता का विषय बन गया। कुछ पाठकों ने तो उनसे सोयलेंट की रेसिपी भी माँगी और उनकी बताई रेसिपी के आधार पर सोयलेंट बनाना शुरू कर दिया। लोगों ने अपने-अपने अनुभव राइनहार्ट के साथ साझा भी किये जो उनके लिए बहुत ही उपयोगी था।

किचन के प्रयोग से हुई फ़ूड कंपनी की शुरुआत

अपने बनाये इस मिश्रण को राइनहार्ट ने लगातार तीन महीने तक इस्तेमाल किया। उनके साथ ही उनके रूममेट्स ने भी सोयलेंट का इस्तेमाल करके देखा। इस दौरान उन्होंने इसमें कुछ सुधार भी किये और अपने अनुभव और नई रेसिपी भी ब्लॉग पर लगातार रीडर्स के साथ शेयर करते रहे। इसके बाद राइनहार्ट और उनके रूममेट्स को लगा कि सोयलेंट से केवल उनकी ही नहीं बल्कि उन जैसे लाखों लोगों की समस्या हल हो गई है। उन्होंने विचार किया कि इस प्रोडक्ट को मार्केट में उतारा जा सकता है और इसी के साथ उन्हें एक बेहतरीन बिज़नेस आइडिया मिल गया।

अपनी इस सोच को साकार करने के लिए राइनहार्ट और उनके रूममेट्स ने मिलकर सिंथेटिक फ़ूड बिज़नेस के इस आइडिया पर काम करना शुरू कर दिया। अब तक सोयलेंट लोगों के बीच अपनी पहचान बना चुका था। राइनहार्ट और उनके रूममेट्स मैट कॉबल (Matt Cauble), जॉन कूगन (John Coogan) और डेविड रेंटा (David Renteln) ने फंड जुटाने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया। क्राउडफंडिंग की वेबसाइट टिल्ट (Tilt) पर अपने कैम्पेन के ज़रिये वे लगभग 1.5 मिलियन डॉलर की धनराशि प्री-ऑर्डर के तौर पर जुटाने में सफल रहे।

इसके साथ ही 2013 में राइनहार्ट ने बतौर संस्थापक एवं सीईओ अपने सह-संस्थापकों मैट कॉबल, जॉन कूगन और डेविड रेंटा के साथ मिलकर ‘रोज़ा फ़ूड्स’ की स्थापना की। अप्रैल 2014 में पहली बार सोयलेंट का व्यावसायिक वितरण शुरू हुआ। इसके बाद कुछ एंजल इन्वेस्टर्स ने भी इस कंपनी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए मिलियन डॉलर का निवेश किया।

आलोचना और असफलता से ली प्रेरणा

किसी भी नए प्रयास या बिज़नेस को कई तरह की समस्याओं और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए किसी भी बिज़नेस में सफलता पाने के लिए इन बाधाओं और समस्याओं को सुलझाने और उनका हल निकालने का कौशल होना ज़रूरी है। राइनहार्ट तथ्यों पर आधारित आलोचना का खुले दिल से स्वागत करते हैं। सोयलेंट का इस्तेमाल करने वाले कुछ उपभोक्ताओं का मत था कि इसके नियमित इस्तेमाल से गैस्ट्रोइंटेस्टिनल समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके बाद सोयलेंट बनाने वाली कंपनी ‘रोज़ा फ़ूड्स’ ने अपने फॉर्मूलों में बदलाव किया और सोयलेंट का नया वर्ज़न लॉन्च किया। 2015 में ही कंपनी को स्वास्थ्य संबंधी मापकों को पूरा ना करने के आरोप में कानूनी विवादों का सामना भी करना पड़ा।

इसी साल सितम्बर 2015 में सोयलेंट का पहला ‘रेडी टू ड्रिंक’ प्रारूप भी मार्केट में आया। जून 2015 में कनाडा में भी सोयलेंट की बिक्री शुरू हुई जो इससे पहले केवल यू.एस.ए तक सीमित थी।अगस्त 2016 में कंपनी ने ‘सोयलेंट बार’ नामक एक नया प्रोडक्ट लॉन्च किया जिसे खाया जा सकता था। लेकिन इसके सेवन से गैस्ट्रोइंटेस्टिनल समस्याओं की सूचना मिलने के कारण कंपनी ने इसका उत्पादन और विक्रय रोक दिया। साथ ही उपभोक्ताओं को प्रयोग में ना लाई गई सोयलेंट बार लौटाने पर पूरे पैसे वापस करने की घोषणा की। इसी दौरान सोयलेंट पाउडर में भी ऐसी ही समस्या उत्पन्न होने के कारण उसका  वितरण और विक्रय भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। लैब टेस्टिंग के बाद फॉर्मूला में सुधार किया गया और उसके बाद एक बार फिर सोयलेंट का नया वर्ज़न लॉन्च किया गया। कंपनी का यह निर्णय सफल रहा और इससे सोयलेंट के उपभोक्ताओं में वृद्धि भी हुई।

कई बाधाओं के बावजूद सोयलेंट अपने बेहतरीन काम के कारण मई 2017 में GV (पूर्व में गूगल वेंचर्स) के नेतृत्व में सीरीज़ बी फाइनेंसिंग राउंड में 50 मिलियन डॉलर जुटाने में सफल रहा जिसके साथ सोयलेंट की कुल फंडिंग 74.5 मिलियन डॉलर तक पहुँच गई।

अक्टूबर 2017 में सोयलेंट को कनाडा में बैन का सामना करना पड़ा। कनैडियन फ़ूड इन्स्पेक्शन एजेंसी (CFIA) ने इस पर मील रिप्लेसमेंट लेबल होने और इस श्रेणी के लिए निर्धारित मानकों को पूरा न करने के कारण कनाडा में इसकी बिक्री पर रोक लगा दी। यह बैन तब तक लागू रहेगा जब तक सोयलेंट उनके द्वारा तय मानकों पर ख़रा नहीं उतरता। इस समस्या के समाधान के लिए इस दिशा में भी रोज़ा फूड्स लगातार काम कर रही है।

लगातार आगे बढ़ता हुआ सोयलेंट

रोज़ा फूड्स अपने बिज़नेस के साथ-साथ दुनिया में जरुरतमंदों की मदद के लिए वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम यू.एस.ए तथा कैलिफ़ोर्निया के विभिन्न फ़ूड बैंक्स के साथ मिलकर सोयलेंट के रूप में भोजन उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहा है। साथ ही अस्पतालों में मरीज़ों को लिक्विड डाइट के रूप में ज़रूरी पोषण उपलब्ध कराने के लिए भी सोयलेंट का इस्तेमाल हो रहा है। अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में भी सोयलेंट का ट्रायल किया जा रहा है और अपने वेबसाइट के अलावा सोयलेंट अब आमेज़न और दूसरे बड़े ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स में भी उपलब्ध है।

जनवरी 2018 में सोयलेंट का एक नया कोको फ्लेवर्ड पाउडर लॉन्च किया गया है और भविष्य में रोज़ा फूड्स सोयलेंट जैसे और भी नए प्रोडक्ट लाने की तैयारी में हैं जिससे सभी को पर्याप्त पोषण मिलना और भी सरल एवं सुगम हो सके।

बिज़नेस कहानी की राय

इस बिज़नेस कहानी से स्टार्ट अप से जुड़ी हुई बहुत सी अच्छी बातों की सीख मिलती है। उन बातों के अलावा हम अपने पाठकों का ध्यान इस बात पर आकर्षित कराना चाहेंगे कि भोजन और पोषण हमारे प्यारे भारत देश में आजादी के इतने साल बाद भी एक बहुत बड़ी समस्या है। सरकार के साथ-साथ हम सभी जिम्मेदार लोगों को इस विषय पर लगातार सोचना चाहिए और इस क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय स्टार्ट अप्स को सभी संभव सहयोग देने की कोशिश करनी चाहिए। यह कोशिश इन नए व्यवसायों को मार्गदर्शन, फंडिंग, मार्केटिंग या सरकार की योजनायों से परिचित करा के की जा सकती है। अगर हम सभी लोग ध्यान से सोचें तो किसी न किसी तरह हम इस दिशा में जरुर सहयोग कर सकते हैं. ज्यादा कुछ नहीं तो ग्राहक ही बन कर ऐसे स्टार्ट अप का हौसला बढ़ा सकते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा युवक और युवतियाँ इस क्षेत्र में बढ़ते ग्राहकों को देखकर बिज़नेस करने के लिए प्रोत्साहित हों।

हम आशा करते हैं कि आपको यह बिज़नेस कहानी पसंद आयी होगी और आप इसको अपने मित्रों से जरुर शेयर करेंगे.

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