प्रेरणादायक कहानियाँ

कठपुतलियों की प्रदर्शनी देखने के जुनून ने दिया सफलता का रास्ता – Story of Amanda Hocking

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यह बात सही है कि एक समस्या या आवश्यकता इन्सान को रचनात्मक हल ढूँढने के लिए मजबूर कर देती है. अपनी समस्याओं का समाधान प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिखने पर आप अलग-अलग तरीकों से सोचते हैं और हर एक संभावना को तलाशते हैं. यही कोशिश आपको ऐसी सफलताएं दिलवाती है जो दुनिया के लिए एक मिसाल बन जाता है और आप गर्व से फूले नहीं समाते.

अमेरिका के मिनिसोटा (Minnesota) स्टेट में रहने वाली मशहूर लेखिका अमान्डा हॉकिंग (Amanda Hocking) को भी पहली सफलता अपनी समस्या का नवीनतम समाधान ढूँढने से ही मिली. इस कदम से अमान्डा को एक साल के अन्दर ही $20 लाख डॉलर (लगभग 13 करोड़ रुपये) की कमाई हुई और उसे एक अच्छी लेखिका की पहचान मिली. अमान्डा को इन्टरनेट पर आत्म प्रकाशन (Self Publishing) से अपनी किताबें प्रकाशित करने वाले लेखकों में अग्रणी माना जाता है परन्तु इस सफलता के पीछे अमान्डा के संघर्ष और निराशा की एक लम्बी कहानी है जिसने अमान्डा को नए तरीके सोचने पर मजबूर किया.

अमान्डा की कहानी

12 अप्रैल 1984 को जन्मी अमान्डा का बचपन  मिनिसोटा (Minnesota) के एक छोटे से कस्बे के साधारण परिवार में गुजरा. छोटी उम्र में ही उसके माता-पिता अलग हो गए थे जिससे वह बचपन से ही काफी अकेलापन महसूस करती थी. किताबें पढ़ना अमान्डा को बहुत अच्छा लगता था क्योंकि इससे वह किताबों की दुनिया में खोकर वास्तविक दुनिया से बहुत दूर हो जाती थी. किताबों के प्यार से अमान्डा की कल्पनाओं को पंख मिल गए और वह धीरे-धीरे लिखने भी लगी. 12 साल की उम्र तक 50 से अधिक लघु कथाएं लिखकर तथा अनगिनत उपन्यासों की भूमिका बनाकर वह अपने आप को एक लेखिका के रूप में देखने लगी. 17 वर्ष की उम्र में अमान्डा ने अपना पहला नावेल पूरा किया और उसे अपने करीबी लोगों के लिए खुद ही प्रिन्ट भी किया. अमान्डा ने किताब के प्रकाशकों को भी संपर्क किया परन्तु उसके हाथ सिर्फ निराशा ही लगी और वहां से अगले 8-9 वर्षों तक किताब लिखने तथा प्रकाशकों द्वारा नकारे जाने का सिलसिला चलता रहा. इस दौरान उसने अनगिनत प्रकाशकों से संपर्क किया जहाँ से उसको सिर्फ और सिर्फ नकारात्मक जवाब ही मिले,परन्तु आगे का रास्ता स्पष्ट न होते हुए भी अमान्डा लगातार लिखती रही.

2010 की शुरुआत तक उसने लगभग 17 किताबें लिख लीं जिसमें से एक भी किताब प्रकाशित नहीं हो पाई थी और सभी उसके कंप्यूटर में लिखकर पड़ी हुई थीं. उन दिनों वह दिव्यांग व्यक्तियों की देखभाल का काम करके सालाना 18,000 डॉलर कमाती थी जिसमें किसी तरह उसका गुजारा हो जाता था. फ़रवरी 2010 में वह अपने घर पर उदास और परेशान बैठी थी क्योंकि इतनी मेहनत के बावजूद एक भी प्रकाशक उसकी किताबों को छापने के लिए तैयार नहीं हो रहा था. अमान्डा बचपन से ही जिम हेन्सन के बनाए हुए कठपुतलियों (Muppets) की बहुत बड़ी फैन थी और उस साल के अंत में शिकागो शहर में जिम हेन्सन के मपेट्स की प्रदर्शनी लगने वाली थी. इस प्रदर्शनी को देखने के लिए अमान्डा बेताब थी,परन्तु उसके पास शिकागो जाने और वहां रुकने के लिए एक भी पैसा नहीं था. इस बात ने उसकी निराशा को ज्यादा बढ़ा दिया और सोचते-सोचते उसने फैसला लिया कि वह अपनी किताबों को आमेज़न (Amazon) पर स्वयं प्रकाशित करके बेचेगी और मपेट्स का शो देखने के लिए 300 डॉलर कमाने की कोशिश करेगी. मपेट्स शो के 6 महीने पहले अप्रैल 2010 में उसने अपनी पहली किताब आमेज़न पर प्रकाशित किया तथा धीरे-धीरे लोग उसकी किताबें खरीदने लगे. आमेज़ान के साथ-साथ दूसरे ऑनलाइन चैनलों पर भी उसने अपनी किताबें प्रकाशित कीं. अक्टूबर 2010 तक 6 महीनों में उसने 20,000 डॉलर की कमाई सिर्फ किताबें बेचकर कर ली जो लगातार बढ़ती रही जैसे पैसों की बरसात शुरू हो गयी हो. देखते ही देखते वह हर महीने 1 लाख से भी ज्यादा प्रतियाँ बेचने लगी. अमान्डा ने अपनी नौकरी छोड़ दी, कठपुतलियों का खेल देखने शिकागो गयीं और वापस आकर किताबें लिखकर ऑनलाइन प्रकाशन का काम करने लगी.

उसकी सफलता की गूँज दुनिया भर के प्रकाशकों के ऑफिस में सुनाई देने लगी और सभी अमान्डा की किताब छापने के लिए उसके पीछे भागने लगे. मार्च 2011 में उसने सेंट मार्टिन्स प्रेस नामक एक बड़े प्रकाशक के साथ 20 लाख डॉलर का पहला कॉन्ट्रैक्ट साइन किया. पिछले ७ सालों में लगभग 25 किताबें प्रकाशित करके अमान्डा ने खूब नाम कमाया और उसके पाठकों ने उसकी लिखी हुई भूत-प्रेत और आत्माओं की प्रेम कहानियों को बहुत पसंद किया.

बिज़नेस कहानी की राय

ऐसी कहानियों को पढ़कर लगता है कि कुछ लोगों को सफलता बहुत जल्द मिल जाती है,परन्तु यह सच नहीं है,क्योंकि अचानक से या रातों-रात सफल हुए व्यक्ति के पीछे भी कड़ी मेहनत और चुनौती की लम्बी कहानी होती है.अमान्डा ने वर्षों की निराशा के बावजूद लिखना जारी रखा और जब सफलता मिली तो बहुत तेजी से उसका जीवन बदल गया. यदि इतने सालों तक बिना हारे हुए कड़े परिश्रम से किताबें नहीं लिखी होती तो उसके पास इन्टरनेट पर प्रकाशन के लिए पर्याप्त कहानियाँ नहीं होतीं और सफलता मिलना असंभव होता. किसी भी क्षेत्र में सफल होने से पहले की तैयारी का समय अकेलेपन से भरा होता है.आपके अलावा किसी को भी लक्ष्य नहीं दिखता और अपने लक्ष्य के प्रति उत्साहित रहने के लिए आपको मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में कभी भी निराश ना हों और निरन्तर कोशिश करते रहें,क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. 

 

 

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