प्रेरणादायक कहानियाँ

Googol से बना Google -विश्व के सबसे बड़े इन्टरनेट सर्च इंजन की कहानी

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आज के हमारे इन्टरनेट जीवन में गूगल यानि google search का बहुत बड़ा महत्व है. दुनिया का लगभग दो-तिहाई वेब सर्च गूगल के जरिये होता है. आज आपको कोई भी Information चाहिए तो गूगल चुटकियों में दे देता है. आज के समय में गूगल एक बहुत बड़ी कंपनी है और विभिन्न व्यवसायों में मौजूद है परन्तु आप में से बहुत से लोगों को शायद यह जानकर आश्चर्य होगा कि गूगल की नींव 1995-96 में अमेरिका की मशहूर स्टैनफ़र्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) के दो छात्रों के पीएचडी के प्रोजेक्ट से पड़ी. लैरी पेज (Larry Page) और सर्गे ब्रिन (Sergey Brin) की मुलाकात यूनिवर्सिटी में हुई जब लैरी यूनिवर्सिटी देखने आये थे और सर्गे वहां पहले से ही पढ़ रहे थे. पहली मुलाकात में दोनों की उतनी नहीं बनी परन्तु लैरी के पीएचडी में एडमिशन ले लेने के बाद दोनों की दोस्ती बढ़ गयी और वो दोनों एक ही प्रोजेक्ट पर काम करने लगे.

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लैरी ने अपने पीएचडी गाइड टेरी विनोग्रैड से बात करके फैसला लिया कि वो इन्टरनेट की दुनिया में World Wide Web के मैथमेटिकल गुणों पर रिसर्च करेंगे. लैरी ने अपने प्रोजेक्ट को ‘बैक रब’ (BackRub) का नाम देकर काम शुरू कर दिया और कुछ समय बाद सर्गे भी उनके साथ जुड़ गये जो आगे चल कर गूगल बना.

प्रोजेक्ट रिपोर्ट से कंपनी तक

पीएचडी का प्रोजेक्ट 1998 में पूरा हुआ और तब तक दोनों को यह विश्वास हो गया था कि उनका प्रोजेक्ट इन्टरनेट सर्च की दुनिया में बहुत बड़ी क्रांति ला सकता है. यूनिवर्सिटी ग्रांट, दोस्तों और घर वालों की मदद से दोनों ने सर्वर ख़रीदा और एक दोस्त का गराज किराये पर लेकर काम शुरू कर दिया परन्तु अभी तक कंपनी नहीं स्थापित हुई थी.

लैरी और सर्गे के मन में कंपनी का एक नया नाम रखने का विचार था क्योंकि उनको अपने प्रोजेक्ट का नाम ‘बैक रब’, कंपनी के लिए उपयुक्त नहीं लग रहा था. बहुत सोच-विचार के बाद कंपनी का नाम ‘गूगल’ (Google) रखा गया जो कि गूगोल (Googol) से बनाया गया, Googol एक गणित का शब्द है जिसका मतलब है ऐसी संख्या जिसमें 1 के बाद 100 शून्य होते हैं.

Sun Microsystems नाम की एक बड़ी कंपनी के सह-संस्थापक, Andy Bechtolsheim, पहले एंजल इन्वेस्टर बने और उन्होंने एक लाख डॉलर का चेक दिया परन्तु गूगल के पास चेक जमा करने के लिए बैंक अकाउंट ही नहीं था. दो हफ्ते बाद कंपनी का रजिस्ट्रेशन हुआ जिससे बैंक अकाउंट खुला और चेक जमा किया गया. एंडी के बाद, भारतीय मूल के मशहूर एंजल इन्वेस्टर, राम श्रीराम, ने भी शुरूआती दौर में गूगल में इन्वेस्ट किया और Amazon के संस्थापक जेफ़ बेज़ोस से भी इन्वेस्ट करवाया. इन सभी एंजल इन्वेस्टरों के पैसों में खूब बढ़ोत्तरी हुई क्योंकि गूगल दुनिया की एक बहुत बड़ी कंपनी बन गयी.

आज का गूगल और अल्फाबेट

आज गूगल एक जाना – पहचाना शब्द है जिसको ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में शामिल कर लिया गया है और छोटे बच्चे भी गूगल के सर्च की शक्ति अपनी उँगलियों में रखते हैं. अपनी शुरुआत से लगभग 19 साल बाद बाज़ार में पूंजीकरण (Market Capitalisation) के आधार पर आज गूगल दुनिया की दूसरे नंबर की कंपनी है (पहले नंबर पर iPhone की कंपनी Apple है). गूगल के शेयर का आईपीओ 2004 में आया था और तबसे कंपनी के शेयर में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है.

अभी तक गूगल ने लगभग 200 से भी ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियों को खरीदा है जिसमें YouTube, Andriod और Double Click जैसी कम्पनियां शामिल हैं और इन सभी 200 से भी ज्यादा कंपनियों के माध्यम से आज गूगल बहुत सारे क्षेत्रों में अग्रसर है.

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अक्टूबर 2015 में कंपनी ने अपने बिज़नेस का पुनर्गठन किया और सभी कंपनियों को व्यवस्थित करने के लिए Alphabet Inc. नाम की पैत्रिक कंपनी बनायी गई. इस व्यवस्था में भी गूगल सबसे बड़ा बिज़नेस है और पूरे मैनेजमेंट का खास ध्यान गूगल पर रहता है. अल्फाबेट में लैरी ने सीईओ का और सर्गे ने प्रेसिडेंट का पद लिया तथा भारतीय मूल के होनहार कर्मचारी सुन्दर पिचाई की नियुक्ति गूगल के सीईओ के रूप में कर दी गयी.

Business Kahani की राय

गूगल की कहानी से एक बात का ज्ञान मिलता है कि बड़े से बड़े बिज़नेस का आइडिया कहीं से भी आ सकता है. पीएचडी का प्रोजेक्ट करते समय लैरी और सर्गे ने नहीं सोचा होगा कि वो कितने बड़े बिज़नेस की नींव रखने जा रहे हैं. उन्होंने मन लगाकर छोटी-छोटी चुनौतियों का हल ढूँढा और धीरे-धीरे अगला कदम बढ़ाते हुए इतनी ऊंचाई पर आ गए जिस पर 72,000 से भी ज्यादा कर्मचारी निर्भर हैं, अनगिनत सप्लायर और चैनल पार्टनर का रोजगार चल रहा है तथा पूरा मानव समाज इनके बनाये हुए बिज़नेस से लाभान्वित हो रहा है. हमें पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में हम इनको और भी ऊंचाइयां छूते हुए देखेंगे.

हमारे हिंदी पढ़ने वाले भाईयों और बहनों, आपके अन्दर भी यह क्षमता है. अपने आस-पास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखिये और सोचिये कि क्या सुधार लाया जा सकता है. आपका पहला कदम, दृढ़ संकल्प और बड़ी सोच के साथ बहुत दूर जा सकता है क्योंकि आपको लोग मिलते जायेंगे और कारवां बनता जाएगा.

हम आशा करते हैं कि आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी और आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से जरूर शेयर करेंगे ताकि वो भी रोज उपयोग में आने वाले गूगल की कहानी जान सकें और इससे प्रेरणा लेकर हमारे हिंदी भाषी क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कुछ कर सकें.

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